गावों को मिले इलाज

वार्षिक व पंचवर्षीय योजनाओं में सरकार ने स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को मजबूत करने का वादा किया है। मगर उसके ठीक उलट हर साल बच्चों, वयस्कों व महिलाओं को अनिश्चितता से भरा जीवन का सामना इसलिए करना प़डता है कि आज भी ग्रामीण और शहरी भारत में बुनियादी चिकित्सा प्रणाली का अभाव है। वहीं ऐसा भी लगता है कि वर्तमान स्वास्थ्य सेवा सिर्फ महानगरीय शहरों की ब़ढती जरूरतों को पूरा करती है। यहां तक कि यह केवल उन लोगों के लिए सुलभ होने के कारण एक क्रूर मजाक है, जो इसे खरीद सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं के ७५ फीसदी डॉक्टरों और विशेषज्ञों व अन्य स्वास्थ्य संसाधनों सहित शहरी इलाकों में केंद्रित हैं, जहां भारत की आबादी का केवल २७ फीसदी रहता है। भारत की ग्रामीण आबादी ७१६ मिलियन यानी ७२ फीसद है और फिर भी उनके लिए उचित चिकित्सा सुविधाओं की पुरानी कमी है। यह शहरी और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवा सूचकों में अंतर के कारणों में से एक है। इनमें से अधिकतर आंक़डे भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के मामले में दुखद स्थिति दिखाते हैं। तथ्य यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों या छोटे शहरों और शहरों में रहने वाले अधिकांश लोग अस्पताल, दवाइयों और डॉक्टरों सहित महत्वपूर्ण चिकित्सा सुविधाओं तक पहुंच नहीं पाते हैं। हर पांचवीं योजना में उचित चिकित्सा देखभाल के साथ ही रिक्तिपूर्व देखभाल सुविधाओं का नियमित रूप से उल्लेख किया जाता है, लेकिन किसी भी तरह की योजनाएं समाप्त हो जाती हैं और हर साल अर्थशास्त्री मौत के ननए आंक़डों के साथ आते हैं। तो हम गलत कहां जा रहे हैं्। स्वास्थ्य सेवा उद्योग में अस्पतालों, फार्मास्युटिकल कंपनियों, ड्रग निर्माताओं, निदान और उपकरण निर्माताओं और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और सूचना प्रदाताओं जैसी सेवाओं की एक विस्तृत शृंखला शामिल है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल के लिए सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकताओं में से एक डॉक्टर है, डॉक्टरों और चिकित्सा विशेषज्ञ भारतीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली का एक अभिन्न अंग हैं, लेकिन ग्रामीण भारत वर्तमान में डॉक्टरों की ६४ फीसद कमी का सामना कर रहा है। ग्रामीण भारत में १२,३०० से अधिक विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। एक तीन स्तरीय प्रणाली जिसमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र विशेषज्ञ सेवाओं के साथ ४ पीएचसी के लिए एक ३० बिस्तर अस्पताल व रेफरल इकाई। राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन की एक रिपोर्ट में भारत में ग्रामीण स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली की वर्तमान स्थिति के सापेक्ष कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को उजागर किया गया है जिसमें शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण आबादी में डॉक्टरों का अनुपात छह गुना कम है। शहरी क्षेत्रों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में जनसंख्या का अनुपात १५ गुना कम है। ग्रामीण आबादी का ६६ प्रतिशत निरोधक दवाओं तक पहुंच का अभाव है। ग्रामीण आबादी का ३१ फीसदी हिस्सा आवश्यक चिकित्सा उपचार के लिए ३० किमी से अधिक की यात्रा करना है।