रसायनों का भंडारण

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पिछले दिनों दिल्ली के तुगलकाबाद क्षेत्र में हुए खतरनाक रसायन रिसाव के मुद्दे की गंभीरता इस बात से पता चलती है कि इस क्षेत्र के एक स्कूल के लगभग ४०० बच्चियों को आपातकालीन चिकित्सा की आवश्यकता प़डी और उन्हें शहर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया था। हालाँकि अधिकांश छात्राओं को उसी दिन प्राथमिक चिकित्सा के बाद घर भेज दिया गया परंतु कुछ की हालत गंभीर बनी रही और उन्हें कुछ दिनों तक आईसीयू में रखा गया। इस घटना के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने पांच सदस्यों की एक टीम बनाई और रिसाव के कारणों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी। विशेषज्ञों ने पाया कि तुगलकाबाद क्षेत्र में जो कंटेनर डिपो बनाया गया था उसे तुरंत स्थानांतरित करने की आवश्यकता है क्योंकि जब इस डिपो को बनाया गया होगा तब क्षेत्र में आबादी बहुत सीमित रही होगी लेकिन जिस तरह से दिल्ली के सभी क्षेत्रों का पिछले कुछ सालों में विकास हुआ है उससे डिपो के आसपास आबादी में ब़डे पैमाने पर वृद्धि हुई है। दिल्ली में हुई इस घटना को हलके में लेने की गलती केंद्र सरकार कतई नहीं कर सकती है और उसे यह भी समझना होगा कि अगर खतरनाक रसायन के रिसाव होने के कारण उत्पन्न हुई गैस जानलेवा होती तो घटना राष्ट्रीय आपदा भी बन सकती थी। केंद्र सरकार को इस मामले में सख्ती बरतनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश भर में जिधर भी इस तरह के डिपो हैं या अगर कहीं खतरनाक रसायन का भण्डारण किया जा रहा हो तो उसके लिए क़डे नियम जारी किए जाने चाहिए और उनका सख्ती से पालन भी होना चाहिए। ऐसे डिपो को शहर या ग्रामीण आबादी से दूर स्थानांतरित किया जाना चाहिए ताकि अगर किसी कारणवश जहरीली गैस का रिसाव होता है तो उस बार बिना नुकसान काबू पाया जा सके। सच तो यह है कि दिल्ली में हुई घटना में मानवीय लापरवाही ही प्रमुख कारण है। दिल्ली के तुगलकाबाद डिपो में ऐसे खतरनाक रसायनों से भरे दो सौ से अधिक कंटेनर अभी मौजूद हैं। ऐसा ही हाल देश के अलग-अलग क्षेत्रों का भी होगा जहाँ पर इस तरह के डिपो हैं। सरकार को अब यह सुनिश्चित करना होगा की सुरक्षा संबंधी नियमों का सख्ती से पालन किया जाए वरना भविष्य में भोपाल गैस त्रासदी जैसी घटना पुनः हो सकती है। अगर देश के दुश्मनों को ऐसे भंडारों का पता चले तो वह इन्हें आसानी से निशाना बनाकर भारी तबाही मचा सकते हैं। ऐसे डिपो में सुरक्षा के बंदोबस्त भी क़डे नहीं होते और किसी के लिए भी इन डिपो में प्रवेश करना बहुत आसान होता है। सरकार को अब यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश के जिन डिपो में खतरनाक रसायन का भण्डारण और वस्तुसूची प्रबंधन वरिष्ठ सरकारी अधिकारी की निगरानी में किया जाए। सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि किसी भी एक भण्डार में ऐसे रसायनों का भण्डारण एक साथ न किया जाए। अगर खतरनाक रसायन एक साथ एक ही जगह पर रखे गए हों तो वह एक रासायनिक बम्ब जैसा खतरा पैदा करते हैं जो कभी भी भीषण तबाही मचा सकता है। देश की जनता के जीवन की सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार पर है और ऐसे गंभीर मामलों में बिना समय गंवाए सरकार को मजबूत नीति बनाकर दीर्घकालिक उपाय निकलना चाहिए।