व्यापारिक युद्ध का खतरा

अमेरिका द्वारा रूस पर लगाए गए व्यापारिक प्रतिबंधों के मद्देऩजर रूस ने अमेरिका पर व्यापारिक युद्ध के आरोप लगाए हैं्। रूस ने कहा है की उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों से अमेरिका अपनी मनमानी की कोशिश कर रहा है। कहा यह जारहा है की अमेरिका ने पिछले वर्ष हुए राष्ट्रपति चुनाव में रूस की कतिथ ढकालन्दा़जी और साथ ही यूक्रने में सैन्य कारवाही के खिलाफ रूस को आ़डे हाथों लेते हुए यह कारवाही की है। अनेक अमेरिकी कम्पनियां रूस में ऊर्जा क्षत्र और साथ ही ढांचागत विकास के क्षेत्र में भरी निवेश करती रहीं हैं अब अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद कम्पनियों के लिए निवेश करना आसान नहीं रहेगा। अब रूस ने भी फैसला करलिया है की अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने के लिए रूस भी अब अमेरिका से व्यपारी रिश्तों में कटौती करेगा और साथ ही यह सुनिश्चित करेगा की अमेरिका को उन क्षेत्रों में क़डी मशकत करनी प़डे जहाँ वह उद्पदन कार्य में रूस पर निर्भर है। पिछले कुछ दशकों में देशों के बीच रिश्तों को सियासी फैसलों से काम और आर्थिक संबंधों पर ज्यादा आँका जाने लगा था। अपने देश के विकास और वैश्विक व्यापार परिदृश्य में विपरीत ध्रुवों को भी मिला दिया। रूस और अमेरिका जैसे ही भारत के भी पकिस्तान से व्यापारिक रिश्ते बरकारार हैं्। अगर भारत पकिस्तान से पूरी तरह से व्यापार बंद करदेता है तो इसका असर दोनों देशों पर प़डेगा।व्यापार के जरिए समृद्ध होते देशों के समक्ष ऐसे प्रतिबन्ध किसी व्यापारिक युद्ध से कम नहीं हैं्। लगभग सभी देशों के राष्ट्रीय उत्पादन का एक ब़डा हिस्सा व्यापार के लिए ही समर्पित रहता है लेकिन हाल के वर्षों में यह प्रक्रिया पुनः पलटती ऩजर आने लगी है। वैश्विक स्तर पर किसी भी ब़डी सियासी घटना का सीधा असर देशों के बीच होने वाले व्यापार पर प़डता है। अमेरिका और यूरोप की राजनीति में दक्षिणपंथ का उभार तेज हुआ, जिसकी परिणति कभी ब्रेग्जिट तो कभी ट्रंप के रूप में दिखाई प़डी। दक्षिणपंथ राष्ट्रीय सीमाओं को यथासंभव बंद रखने, रोजी-रोजगार स्थानीय लोगों को देने और व्यापार में संरक्षणवादी नीति अपनाने के नारे के साथ सत्ता में आया है और अभी वह अपने नारों पर अमल करने में जुटा है। उसी वर्ग का दबाव आज विभिन्न देशों की सरकारें महसूस कर रही हैं और वे इसे संतुष्ट करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं्। अमेरिकी प्रतिबंध इसी प्रक्रिया का एक हिस्सा है, जो न सिर्फ अमेरिका-रूस के व्यापार को प्रभावित करेगा बल्कि पूरी दुनिया पर असर डालेगा। इसी तरह बदले में रूस भी ऐसी कार्रवाई कर सकता है, जिससे अमेरिकी इकोनॉमी प्रभावित हो। दुनिया अभी आर्थिक रूप से कितनी जु़डी हुई है, इसका अंदाजा खा़डी देशों में आए संकट से भारत में देखी जा रही चिंता से लगाया जा सकता है।