श्रीकांत पाराशर
समूह संपादक, द.भा.रा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी विनम्रता से देश की जनता से आग्रह किया है कि रविवार (आज) रात 9 बजे, 9 मिनट के लिए अपने घर की लाइटें बुझाकर, बालकनी में खड़े होकर या घर के दरवाजे पर दीपक, मोमबत्ती, टार्च या फिर अपने मोबाइल की फ्लैश लाइट में से जो सुविधाजनक लगे, जो मन करे, वह जलाकर रोशनी करें और इस प्रकार पूरा देश कोरोना से संघर्ष के लिए अपनी एकजुटता, अपना दृढ़ संकल्प दर्शाए। हम अकेले नहीं हैं, कोई भी अकेला नहीं है, सभी एक ही उद्देश्य के लिए संघर्षरत हैं, इससे यह संदेश सब जगह पहुंचेगा। यह कितना सहज, सरल, सौम्यता से भरा संदेश है जो इस संकट की घड़ी में हर देशवासी का हौसला बढ़ाता है।

जिस प्रकार 22 मार्च को प्रधानमंत्री के आग्रह पर देश की जनता ने “जनता कर्फ्यू” को भरपूर समर्थन देकर उसे सफल बनाया था, वैसे ही इस बार रविवार को भी होने वाला है। देश के हर नागरिक की अपनी अपनी समस्याएं हैं परंतु हर कोई अपनी सभी परेशानियों को भूलकर माननीय प्रधानमंत्री की अपील को अहमियत देकर इस अपील को भी पूरी तरह सिरोधार्य करेगा परंतु देश में एक वर्ग अभी भी ऐसा है जो प्रधानमंत्री के हर अच्छे कदम का विरोध कर उनके हर प्रयास को पटरी से उतारने के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है। कोई इसे धर्म से जोड़ने में भी शर्म महसूस नहीं कर रहा तो कोई इसका मखौल उड़ाने से बाज नहीं आ रहा है।

ऐसे लोग इसमें हिंदू-मुस्लिम का एंगल प्रचारित कर दोनों समुदायों के बीच दूरियां बढ़ाने व आपस में नफरत फैलाने का घिनौना काम कर रहे हैं तो कुछ इसमें राजनीतिक ओछेपन को घुसेड़ रहे हैं। ऐसे लोग कह रहे हैं कि इस समय देश आर्थिक संकट से गुजर रहा है, ऐसे में थाली बजाने या दीप जलाने से क्या होने वाला है। ये लोग प्रधानमंत्री पर जनता को बेवकूफ बनाने का आरोप लगाने से भी नहीं हिचकिचा रहे हैं। इन नासमझ लोगों को कौन समझाए कि कोरोना की समस्या केवल भारत की नहीं है कि मोदी अपनी नाकामयाबियों को छुपाने के लिए इसे लेकर आ गए हों। यह समस्या इस समय किसी क्षेत्र विशेष की नहीं है बल्कि यह वैश्विक संकट है।

शुक्र है, देश के पास इस समय एक जागरूक, सक्रिय, समझदार और समय रहते निर्णय लेने वाला प्रधानमंत्री है, जिसका नाम है नरेंद्र मोदी। जिस समझदारी से प्रधानमंत्री ने कोरोना से निपटने के लिए 21 दिन का लॉकडाउन किया और देश के अधिकांश लोगों ने उनके दिशानिर्देशों का पालन किया, उसको देखते हुए यही लग रहा था कि घोषित समय सीमा में हम कोरोना पर पूरी तरह से विजय पा लेंगे परंतु दिल्ली के निजामुद्दीन क्षेत्र में तब्लीग़ी जमात का मामला उजागर हुआ जिसने सब किए कराए पर पानी फेर दिया। सब गुड़ गोबर हो गया।

कल्पना की जा सकती है कि इस मामले से देश के लोगों में कितना आक्रोश पैदा हुआ होगा, परंतु देशवासियों ने धैर्य रखा। अभी भी धैर्य बनाए हुए हैं। उन्हें मोदी पर पूरा भरोसा है कि वे स्थिति को संभाल लेंगे। भरोसा तो मोदी पर विरोधियों को भी होगा और शायद यही भरोसा उनकी चिंता का कारण है। जिस कोरोना संकट की भयावहता के सामने अमेरिका जैसी महाशक्ति भी असहाय लगती है, उस संकट से यदि मोदी ने पार पा लिया तो मोदी के विरोधियों का क्या होगा?

पहले ही मोदी एक के बाद एक देशहित के निर्णय लेकर मजबूत होते जा रहे हैं और विरोधियों के सारे सपने चकनाचूर होते चले जा रहे हैं। उन्हें शायद लगता था कि अब कोरोना संकट के सामने मोदी घुटने टेक देंगे परंतु मोदी फिलहाल तो नैया पार लगाते दिखाई दे रहे हैं। हां, तब्लीग़ी मरकज मामले ने बहुत रायता फैलाया है, इसमें दो राय नहीं। इससे भी ज्यादा परेशानी का सबब वे दुष्ट लोग बने हुए हैं जो मरकज में लंबे समय से थे और इनमें से बड़ी संख्या में कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। ये देश के विभिन्न भागों में पहुंच गए और बड़ी बखूबी कोरोना वाहक बने हुए हैं। संकट की भयावहता को ये या तो अपढ़, गंवार होने के कारण समझ नहीं पा रहे हैं, या फिर ये किसी बड़ी साजिश के चलते जानबूझकर समझना नहीं चाहते हैं। इनकी हरकतों से तो यही लगता है।

इनमें से कोई पुलिसवालों और डॉक्टरों पर थूक रहे हैं तो कोई बीमारी के पॉजिटिव लक्षण होने के बावजूद जांच कराने से बच रहे हैं। ऐसे लोग सामने ही नहीं आ रहे। जो डॉक्टर इन नासमझों का परीक्षण करने के लिए मोहल्लों में जा रहे हैं तो पुलिस और डॉक्टरों पर ये लोग पत्थर मार रहे हैं, उनकी पिटाई कर रहे हैं। ऐसे लोगों के साथ सख्ती सरकार को आरोपों के घेरे में खड़ा करेगी परंतु सरकार इस डर से अगर बदमाशों पर नियंत्रण करने से बचेगी तो फिर उसकी झोली में नाकामी का ठीकरा भी स्वतः ही आ गिरेगा। अब सरकार को समस्त देशवासियों को बचाने के लिए, उन बदनीयती से सक्रिय लोगों का समय रहत तत्काल उचित इलाज करना चाहिए।

पूरे देश ने देखा कि कोरोना संकट का सामना करने में अपनी जान जोखिम में डालकर किस प्रकार पुलिसकर्मियों, चिकित्सकों, सफाईकर्मियों, पत्रकारों, फुटकर राशन व दूध बेचने वालों ने जनता की जो सेवा की, और कर रहे हैं, वह अतुलनीय है। ऐसे लोगों का हौसला बढ़ाना, उनको नमन करना, उनकी सराहना करना तो दूर, उनकी पिटाई करना, उन्हें गाली देना, उन पर पत्थर फैंकना कौनसी इंसानियत है, किस धर्म या संस्कृति में ऐसा लिखा है? इस समय चिंता की बात यह भी है कि कोरोना संकट भी, आज नहीं तो कल, समाप्त होगा ही परंतु इस समय जो देश के साथ राजनीतिक स्वार्थवश नहीं हैं और बेवजह अच्छे कदमों का विरोध कर रहे हैं उन्हें तो राजनीतिक खामियाजा भुगतना होगा ही किंतु जो किसी साजिश के तहत या बदनीयती से दो समुदायों में वैमनस्य और नफरत फैला रहे हैं, उससे उपजे वातावरण का भविष्य में क्या प्रभाव पड़ेगा, उसका अंदाजा लगाना मुश्किल है।

हालांकि मोदी देश को एकजुट करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में कोई भेदभाव नहीं होने दे रहे लेकिन देश के दुश्मनों की इससे नींद उड़ी हुई है। वे हर संभव नुकसान पहुंचा रहे हैं। अब इन दुष्ट आत्माओं से लड़ने के लिए हम अकेले हमारे प्रधानमंत्री को नहीं छोड़ सकते। आइए, आज 5 अप्रैल को रात 9 बजे वही सब करें जो हमारे प्रधानमंत्री ने हमसे अपेक्षा की है। हम उन्हें भी यह अहसास करा दें कि वे अकेले नहीं हैं। देश का हर देशभक्त नागरिक उनके साथ है, हर पल, हर कदम। बस हमें इतना ही करना है, बाकी सब तो प्रधानमंत्री कर ही लेंगे।