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ईरान की सर्जिकल स्ट्राइक: पाक के आतंकी ठिकानों पर भरपूर हो प्रहार
 
ईरान की सर्जिकल स्ट्राइक: पाक के आतंकी ठिकानों पर भरपूर हो प्रहार
फोटो स्रोत: PixaBay

अमेरिका, भारत के बाद अब ईरान ने भी पाकिस्तान में सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। इससे आतंकवादियों की जन्नत पाकिस्तान एक बार फिर बेनकाब हो गया है, फिर साबित हो गया है कि उसका किसी धर्म और ग्रंथ से कोई संबंध नहीं है। वह सिर्फ आतंकवाद फैलाकर अपने पड़ोसियों को परेशान करना जानता है।

उरी में आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सख्त रुख दिखाया और भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी। पुलवामा आतंकी हमला हुआ तो भारतीय वायुसेना ने बालाकोट में बम बरसाए। इससे पहले अमेरिकी कमांडो एबटाबाद में लादेन का खात्मा कर चुके थे।

अब ईरान ने पाकिस्तानी आतंकवादियों के कब्जे से अपने दो सैनिकों को मुक्त कराने के लिए कठोर कदम उठाते हुए उसके इलाके में घुसकर कार्रवाई की है। एक-एक कर तीन देशों, जिनमें दो उसके पड़ोसी देश हैं, द्वारा पाक में घुसकर सैन्य कार्रवाई यह साबित करती है कि इस्लामाबाद को सही रास्ते पर लाने के लिए यह श्रेष्ठ विकल्प है।

अभी तक पाकिस्तान के राजनेता, सेना प्रमुख परमाणु बम होने की धमकी देते रहते थे। ऐसे बयान यह परिचय देते हैं कि आप कितने गैर-जिम्मेदार देश हैं। उसके मंत्री शेख रशीद के बयान सुनकर तो यही लगता था कि किसी ने बंदर के हाथ में उस्तरा दे दिया है। पाकिस्तान की ये धमकियां बेअसर साबित होने लगी हैं। अब अन्य देश उसके इलाके में सर्जिकल स्ट्राइक कर पोल खोल रहे हैं। परमाणु बम सिर्फ उसी के पास तो नहीं है।

भारत लगातार धैर्य का परिचय देता रहा है। चाहे कारगिल हो या संसद हमला या 26/11, पिछली सरकारों ने सीमा लांघने से से परहेज किया। इससे पाक का दुस्साहस और बढ़ा। अब भारत का मिजाज बदल चुका है। दो बार सीमापार सैन्य कार्रवाई के बाद उसे इतना तो समझ में आ गया होगा कि अगर फिर कोई हरकत की तो जवाब पिछली कार्रवाई से ज्यादा ताकत के साथ दिया जाएगा।

भारत की कार्रवाई का अनुसरण करते हुए ईरान ने सही कदम उठाया है। अपने नागरिकों के जीवन की रक्षा करना उसका कर्तव्य है। पाकिस्तानी आतंकी पूर्व में ईरान से लगती सीमा पार कर वहां हमले करते रहे हैं। इनमें ईरानी सेना के कई जवान जान गंवा चुके हैं।

पाक के जैश अल-अदल आतंकी संगठन ने करीब ढाई साल पहले ईरानी सेना के दर्जनभर जवानों का अपहरण कर लिया था। उनमें से ज्यादातर छुड़ा लिए गए थे लेकिन दो जवान अभी उनकी कैद में थे। ईरान की खुफिया एजेंसियां कई दिनों से उनका सुराग लगाने को लेकर सक्रिय थीं।

आखिरकार उस ठिकाने के बारे में पता चल गया जहां ईरान के जवानों को बंधक बनाकर रखा गया था। यहां ईरानी सेना हमला कर अपने जवानों को सुरक्षित निकालकर ले गई। घटना के बाद से पाकिस्तान में सन्नाटा छाया हुआ है। उसके प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख मीडिया के सामने इस पर जवाब देने से बच रहे हैं।

जैश उल-अदल ईरान से लगती सीमा पर पहले भी इस पड़ोसी देश के सैनिकों का अपहरण करता रहा है। उसने 2014 में ईरान के पांच जवानों का अपहरण कर लिया था। बाद में एक जवान की हत्या कर दी और चार को छोड़ दिया था। इन घटनाओं से इस तथ्य को बल मिलता है कि कुलभूषण जाधव का भी इसी तरह से पाकिस्तान ने अपहरण करवाया था, जिनके बारे में अब वह जासूस होने का झूठा दावा कर रहा है।

पाकिस्तानी आतंकवादियों से अफगानिस्तान भी त्रस्त है। ऐसे में भारत, ईरान और अफगानिस्तान को अपने नागरिकों की रक्षा के लिए पाक के खिलाफ संयुक्त रूप से ऐसी कार्रवाई करते रहना चाहिए। इसके लिए खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान हो, आपसी सैन्य सहयोग बढ़े और जरूरत होने पर पाक के आतंकी ठिकानों पर भरपूर प्रहार हो।