संपादकीय: म्यांमार के बिगड़ते हालात

दक्षिण भारत राष्ट्रमत में प्रकाशित संपादकीय
दक्षिण भारत राष्ट्रमत में प्रकाशित संपादकीय

म्यांमार में सेना द्वारा तख्तापलट के बाद हालात बिगड़ते जा रहे हैं। यह भारत के लिए चिंता का विषय है। अगर पड़ोसी देश में आग भड़क रही होगी तो हम उसके असर से ज्यादा समय तक बच नहीं सकते। म्यांमार में तानाशाहों की सख्ती के बाद लोग जान बचाने के लिए भारत से लगती सीमा पार कर इस ओर आ रहे हैं। अगर भविष्य में भी इसी तरह पलायन होता रहा तो क्या भारत अधिक लोगों का बोझ बर्दाश्त कर सकेगा? इस समय कोरोना महामारी का खतरा बरकरार है।

म्यांमार में व्यवस्था चौपट हो चुकी है। अगर उस पार से कोरोना के मरीज इधर आने लगे तो उसका भारत के नागरिकों पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। साथ ही एक मसला आर्थिक हितों का भी है। अगर इसी भांति लोग आते रहे तो उनका गुजारा कैसे होगा? इस समय भारत स्वयं आर्थिक मोर्चे पर कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, तो पड़ोस की अतिरिक्त आबादी का भरण-पोषण कैसे करेगा?

जो लोग भारतीय सीमा में दाखिल हुए, उनमें आम नागरिकों से लेकर पुलिस अधिकारी तक शामिल हैं। सेना अपना शिकंजा मजबूत कर रही है तो वे मौका देखकर इधर आ गए। अभी नरमी बरते जाने की सूरत नहीं है और दर्जनों लोग मारे जा चुके हैं। सेना पर आरोप है ​कि वह लोकतंत्र समर्थकों के खिलाफ बहुत ज्यादा सख्ती बरत रही है। हालांकि सेना की ओर से इस पर स्पष्ट रूप से कुछ नहीं कहा गया है। जब इंटरनेट पर पाबंदी हो, मीडिया पर ताला लगा हो तो ऐसे आरोपों को बल मिलता है।

बेहतर होगा कि म्यांमार का सैन्य नेतृत्व अब स्थिति की गंभीरता को समझे और फौरन सत्ता निर्वाचित सरकार के हवाले कर दे। इसका उसके देश को लाभ ही होगा। म्यांमार में पहले रहे सैन्य शासन ने उसकी आर्थिक प्रगति को बुरी तरह रौंदा। इस समय जब कोरोना महामारी के प्रभाव से वैश्विक अर्थव्यवस्था उबरने के लिए संघर्ष कर रही है, तो य​​ह कहना गलत नहीं होगा कि हालिया तख्तापलट ने म्यांमार को कई वर्ष पीछे धकेल दिया है। भविष्य में इस देश को इसका गंभीर खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।

दुनिया के कई देशों में विशेषज्ञ आशंका जता चुके हैं कि अगर इस समय मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का पालन नहीं किया गया तो वायरस अधिक प्रबल होकर दोबारा हमला कर सकता है। म्यांमार में इस समय जैसे हालात हैं, उनमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कैसे किया जा सकता है? सड़कों पर उतरी जनता कोरोना संक्रमण का आसान वाहक बन सकती है। भारत ने कई देशों को कोरोना रोधी वैक्सीन दी है। अगर म्यांमार अपने नागरिकों का टीकाकरण करना चाहे तो यह कैसे संभव हो? जब देश में अफरा-तफरी का माहौल होगा तो टीकाकरण प्रभावी ढंग से नहीं हो सकेगा।

इस समय म्यांमार के नागरिकों और अपने हितों की रक्षा के लिए जरूरी है कि भारत इस पड़ोसी देश के सैन्य तानाशाहों पर दबाव डाले, कूटनीति के अस्त्रों का उपयोग करे। म्यांमार के आम नागरिकों का कल्याण इसी में है कि वहां लोकतंत्र की वापसी हो। देश में बहुत मुश्किल से लोकतंत्र बहाल हुआ था, जिसे तानाशाहों ने उखाड़ कर फेंक दिया। अगर म्यांमार का सैन्य शासन सत्ता में काबिज रहने की अपनी जिद न छोड़े तो संयुक्त राष्ट्र संघ को हस्तक्षेप करना चाहिए। इसकी सेना के खिलाफ कठोर प्रतिबंध लगाकर आगामी कार्रवाई का रास्ता साफ किया जाए।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इन प्रतिबंधों के जवाब में म्यांमार की सेना नागरिकों के खिलाफ और सख्त रुख दिखा सकती है। लिहाजा इस बात को प्राथमिकता दी जाए कि सेना से सरकार को शांतिपूर्ण ढंग से सत्ता का हस्तांतरण हो। अगर तानाशाह इसके लिए सहमत न हों और जनता पर जुल्म इतना बढ़ जाए कि उसके झुंड के झुंड भारतीय सीमा में दाखिल होने लगें, तो वह स्थिति हमारे लिए खतरे की घंटी हो सकती है।

इसके समाधान के तौर पर वैश्विक शक्तियों को म्यांमार के सैन्य तानाशाहों के खिलाफ बल प्रयोग करना चाहिए। वह कोई इतनी शक्तिशाली सेना नहीं है कि ज्यादा देर तक उनका सामना कर पाएगी। लोकतांत्रिक ढंग से निर्वाचित होकर आने वाली सरकारों को उलटने वाले तानाशाहों को कड़ा सबक मिलना चाहिए।