पाक में हिंदू मंदिरों पर कहर

प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोतः PixaBay
प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोतः PixaBay

पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के धार्मिक स्थलों की स्थिति के बारे में वहां के उच्चतम न्यायालय के आयोग की रिपोर्ट पर किसी को आश्चर्य नहीं है, होना भी नहीं चाहिए। खासतौर से हिंदू जो वहां का सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समुदाय है, को पाक सरकार, फौज, आईएसआई और आतंकवादियों ने जिस तरह हाशिये पर धकेला है, वह जगजाहिर है।

यह रिपोर्ट कहती है कि पाकिस्तान में हिंदुओं के ज्यादातर धार्मिक स्थल बदहाली का सामना कर रहे हैं। जिन अधिकारियों को उनकी देखरेख और संरक्षण का जिम्मा सौंपा गया, वे इस मामले में पूरी तरह उदासीन हैं। उनके इस रवैए पर किसी को हैरानी क्यों हो, जब पाकिस्तान सरकार का रवैया यही है!

भारत के विभाजन के बाद अ​स्तित्व में आया पाकिस्तान योजनाबद्ध ढंग से हिंदुओं और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों का खात्मा कर रहा है। एक तरफ वह कश्मीर को लेकर मानवाधिकार के नाम पर घड़ियाली आंसू बहाता है, दूसरी तरफ उसका पूरा प्रशासन इस फिराक में रहता है कि उसकी जमीन पर रहने वाले अल्पसंख्यकों का सफाया हो।

वहां आए दिन मंदिरों को निशाना बनाया जाता है। गुरुद्वारों का अपमान होता है और चर्च में तो बम धमाके तक होते हैं। अल्पसंख्यकों की बेटियों का अपहरण कर उनका जबरन धर्मांतरण किया जाता है। अब इंटरनेट के प्रसार की वजह से ऐसे मामले सामने आ जाते हैं। जब तकनीक इतनी विकसित नहीं थी, तब क्या-क्या नहीं होता था!

पिछले साल दिसंबर में खैबर पख्तूनख्वाह के करक स्थित हिंदू धार्मिक स्थल को कट्टरपंथियो की उग्र भीड़ ने निशाना बनाया था। जब उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से पाक की चौतरफा​ निंदा होने लगी तो खुद की छवि सुधारने के लिए दोषियों पर जुर्माना लगाया।

दुनिया को दिखाने के लिए पाक भले ही इस्लामाबाद में मंदिर बनाने का प्रचार कर रहा है, लेकिन असल सवाल यह है कि वह हिंदू कहां से लाएगा। इस्लामाबाद में कितने हिंदू हैं? जो थोड़ी-सी तादाद बच गई है, वह सिंध में है, जहां आए दिन अपहरण और जबरन धर्मांतरण की घटनाएं हो रही हैं। आज पाकिस्तान में बेटियां हिंदू होने की सजा भुगत रही हैं।

अगर इतिहास का अवलोकन किया जाए तो आज जहां पाकिस्तान है, वहां हिंदू, सिख, जैन समाज के अनेक प्राचीन आराधना स्थल हैं। हम कटासराज मंदिर को कैसे भूल सकते हैं जहां हर शिवरात्रि को मेला लगता था, श्रावण में भोलेनाथ का शृंगार होता था! हम हिंगलाज माता के स्थल को भुला नहीं सकते जहां नवरात्र में दर्शन-पूजन करना हर हिंदू का स्वप्न होता था। कराची का हनुमान मंदिर, सिंध के जैन मंदिर, पंजाब के वो स्थान जहां गुरु नानक देवजी के चरण पड़े, हमसे ​छीन लिए गए।

भारत से दुश्मनी के कारण पाक में हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को खासतौर से निशाना बनाया जाता है। कई बार कानूनी हथकंडे अपनाते हुए वे स्थल छीन लिए जाते हैं। ऐसे अनेक मंदिर हैं जिन पर अवैध कब्जा कर लिया गया और बाद में उनका इस्तेमाल अन्य कार्यों के लिए होने लगा। कराची में वरुण देव मंदिर के एक हिस्से को शौचालय बना दिया गया था। इसी प्रकार लाहौर के एक गुरुद्वारे में दुकान खोल ली गई थी। जब कोई इन कृत्यों की शिकायत करता है तो न पुलिस सुनवाई करती है और न ही अदालतें कोई ध्यान देती हैं। थक-हारकर लोग खुद ही समझौता कर लेते हैं।

इसी प्रकार अटक, रहीम यार खान, चकवाल, गुजरांवाला, कसूर, खानेवाल, मियांवाली, मुल्तान, नारोवाल में हिंदुओं के ऐसे कई मंदिर हैं जो वर्षों से बंद हैं। कोई उनकी संभाल करने वाला नहीं और स्थानीय प्रशासन को उनकी कोई फिक्र नहीं। हो सकता है कि कुछ वर्षों में उन पर कोई और इमारत खड़ी कर दी जाए या आतंकवादियों का ट्रेनिंग कैंप शुरू हो जाए!

आए दिन गैर-मुस्लिमों की बेटियों का अपहरण, जबरन धर्मांतरण, लूट, हत्या, अपमान … यह साबित करते हैं कि भारत में सीएए जैसा कदम क्यों जरूरी है। पिछली सरकारों ने इस पर उतनी गंभीरता नहीं दिखाई जितनी जरूरी थी। अब भारत सरकार के साथ आम नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि वे विभिन्न मंचों पर पाक की इस धूर्तता को बेनकाब करें, अल्पसंख्यकों के धार्मिक स्थलों पर हो रहे हमलों के खिलाफ आवाज उठाएं। मानवाधिकारों पर उपदेश देने वाले इमरान खान को उक्त रिपोर्ट पर लज्जित होना चाहिए।