ravan
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बेंगलूरु। दशानन रावण के पुतले का हर साल दशहरे पर दहन होता है। रावण को अत्यंत बलशाली, पराक्रमी और दृढ़ निश्चयी बताया गया है। उस काल में प्रचलित कई विद्याओं का उसे ज्ञान था, परंतु उसने अपनी योग्यता का गलत तरीके से उपयोग किया, जिसकी वजह से स्वयं श्रीराम को उसका आतंक समाप्त करने के लिए अवतार लेना पड़ा।

रावण के संबंध में कई दावे किए जाते रहे हैं। लोकमान्यताओं में ऐसी कई कहानियां हैं और ऐसे कई लोकगीत प्रचलित हैं जिनमें रावण की इच्छाओं का वर्णन मिलता है। यूं तो रावण की अनेक इच्छाएं रही होंगी, लेकिन उनमें से सात इच्छाओं का आज भी कई गीतों और कथाओं में उल्लेख मिलता है। जानिए उनके बारे में।

1. रावण ने घोर तपस्या की थी परंतु वह वैरागी नहीं था। उसका मन भोग-विलास में रमा रहता था। इसके लिए वह मन की सुंदरता नहीं बल्कि तन के आकर्षण पर खास जोर देता था। उसकी चाहत थी कि संसार में सभी लोगों का रंग गोरा हो।

2. अपने दौर में कई योद्धाओं को पराजित कर चुका रावण स्वयं बाली से हार गया था। बाद में श्रीराम ने बाली का वध किया। बाली के हाथों मिली हार को रावण कभी भूल नहीं पाया। वह चाहता था कि उसे शिकस्त दे। उसका यह सपना कभी पूरा नहीं हो सका।

3. कहते हैं कि सोने में माया-मोह का वास होता है और रावण की लंका तो सोने का भंडार मानी जाती थी। रावण की इच्छा थी कि इस कीमती धातु में सुगंध हो तो इसका मूल्य और ज्यादा बढ़ सकता है, परंतु वह ऐसा कभी नहीं कर पाया।

4. रावण ने कई लोगों पर अत्याचार किए थे। उसमें अनेक निरपराध लोगों का रक्त बहा था। इसलिए रावण चाहता था कि खून का रंग लाल नहीं बल्कि सफेद होना चाहिए, ताकि उसके कारनामों की पोल न खुले।

5. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अच्छे कर्म करने वाला मनुष्य स्वर्ग को प्राप्त करता है। वहीं रावण की इच्छा थी कि वह स्वर्ग तक सीढ़ियां लगा दे ताकि लोग बिना सत्कर्म किए स्वर्ग चले जाएं और उसे भगवान का दर्जा दें।

6. रावण विलासी प्रवृत्ति का था। उसे मदिरा से प्रेम था। उसकी इच्छा थी कि मदिरा से दुर्गंध दूर कर दी जाए। यह सपना पूरा होने से पहले ही उसका विनाश हो गया।

7. रावण की लंका से समुद्र ज्यादा दूर नहीं था। उसकी इच्छा थी कि समुद्र का पानी खारा नहीं बल्कि मीठा होना चाहिए। उसका यह सपना कभी पूरा नहीं हो पाया। रावण का जीवन सभी के लिए यह सबक है कि बुराई का मार्ग सदैव विनाश की ओर लेकर जाता है, चाहे कोई व्यक्ति कितना ही बलशाली और ज्ञानी क्यों न हो।

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