गणपति के इन नामों में है शुभ-लाभ और सफलता का वरदान

1331
भगवान गणपति
भगवान गणपति

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। भगवान गणेश प्रथमपूज्य एवं ​सभी सिद्धियों के स्वामी हैं। शुभ कार्यों में सबसे पहले उन्हीं का पूजन किया जाता है, क्यों​कि वे विघ्नों का हरण करते हैं। गणेशजी मात्र एक देवता ही नहीं हैं, वे अपने स्वरूप, शृंगार और नामों से भी हमें सफलता, बुद्धि और विवेक की शिक्षा देते हैं। गणपति का हर नाम बहुत सुंदर है। उसमें हमारे लिए एक संदेश छुपा है। आज हम आपको उनके 4 पवित्र नामों तथा उनमें छुपे सफलता के वरदानों के बारे में बताएंगे।

गजानन
अर्थात् हाथी के समान है जिसका मुख। गणेशजी का मुख हाथी का है। हाथी की आंखें छोटी होती हैं। इसका अर्थ है कि सूक्ष्मदर्शी बनो, दूरदर्शी बनो, अन्वेषण करो। जो परिस्थितियों का सूक्ष्मता से अन्वेषण करता है, निश्चित रूप से वह समाधान पाता है। ऐसा ही व्यक्ति दुनिया में नए आइडिया लेकर आता है।

गजकर्ण
चूंकि गणेशजी के कान भी हाथी के हैं जो आकार में बहुत बड़े होते हैं। इसका अर्थ है दूसरों के विचारों की अनदेखी मत करो। जो व्यक्ति दूसरों की नहीं सुनता, वह टीम को साथ लेकर नहीं चल सकता। एक अच्छे टीम लीडर का गुण होता है कि वह दूसरों के विचारों का भी पर्याप्त सम्मान करता है। भले ही उनसे सहमत या असहमत हो।

लंबोदर
गणेशजी का उदर अर्थात् पेट लंबा होता है। यह समृद्धि का प्रतीक होता है लेकिन इसका एक और संदेश है। लंबे पेट का मतलब होता है रहस्यों को पचा जाना। इसका संदेश है, अगर कोई व्यक्ति आप पर विश्वास करता है और अपने रहस्य बताता है तो उसके रहस्यों को स्वयं तक सीमित रखो। दूसरों के रहस्यों का प्रचार करने वाला व्यक्ति विश्वसनीयता खो देता है।

विनायक
गणेशजी सभी देवों के नायक हैं, क्योंकि उनमें कई गुण समाए हैं। यही कारण है कि हर कोई सबसे पहले उन्हें प्रसन्न करता है। इस नाम का संदेश है कि व्यक्ति गुणों के कारण नायक बनता है। गुणों के साथ शिखर तक पहुंचने वाला व्यक्ति वहां कायम रहता है। अगर किसी में गुण नहीं तो उसका नायक बनना संभव नहीं।