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जो हमारे मन में उतार जाए उसी का नाम मंत्र है: साध्वीश्री दर्शनप्रभा
जिससे हमारे मन की स्थिति सुधर जाए वह मंत्र है
 
मंत्र का उच्चारण, मंत्र का स्मरण, मंत्र का ध्यान करना मंत्र में प्रवेश करने का राजमार्ग हैं।

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। शहर के चामराजपेट जैन स्थानक में साध्वीश्री दर्शनप्रभाजी की निश्रा में उपाध्यायश्री पुष्करमुनिजी की जयंती पर नवकार मंत्र सजोडे जाप का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में  गुरु भक्तों ने लाभ लिया। अलग-अलग नवकार मंत्र की धुन के साथ नवकार मंत्र का जाप हुआ। 

डॉ. समृद्धिश्रीजी ने जाप करवाते हुए कहा कि उपाध्यायश्री पुष्करमुनिजी जप योगी थे। वे नवकार मंत्र के ध्यान में सदा ध्यानमस्त रहते थे। डॉ. दर्शनप्रभाजी ने कहा कि धर्म का अर्थ है धारण करना। स्वयं को धारण करना, दूसरों को धारण करना, एक दूसरे को धारण करना ही धर्म है । लेकिन जब हम स्वयं को धारण करने की बात करते हैं स्वयं में प्रवेश करने को कहते हैं तो मंत्र ही एक मात्र रास्ता है। 

मंत्र का उच्चारण, मंत्र का स्मरण, मंत्र का ध्यान करना मंत्र में प्रवेश करने का राजमार्ग हैं। जो हमारे मन में उतार जाए उसी का नाम मंत्र है। जिससे हमारे मन की स्थिति सुधर जाए वह मंत्र है। 

मंत्र कोई सामान्य शब्दावली नहीं है वह दिव्य प्रकाश किरण है जिसके सहारे हम सूरज तक पहुंच सकते हैं। मंत्र रात के अंधेरे में जलने वाला ऐसा चिराग है जिसे थामकर हम लम्बी दूरी के रास्तों को पार कर सकते हैं। शुक्रवार को प्रभावना के लाभार्थी पारसमल सालेचा एवं बाफना परिवार वाले थे।

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