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असंख्य गुणों के भंडार थे उपाध्यायश्री पुष्करमुनि: साध्वीश्री दर्शनप्रभा
पुष्करमुनिजी जहां जहां पर भी गए वहां धर्म ध्वजा लहराई
 
संतश्री समाधि के सच्चे साधक थे। गुरु से हमें शिक्षा से दीक्षा प्राप्त की। गुरुदेव के मार्गदर्शन में जीवन का मार्गदर्शन पाया। 

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। शहर के चामराजपेट जैन स्थानक में साध्वीश्री दर्शनप्रभाजी ने बुधवार को उपाध्यायश्री पुष्करमुनिजी म.सा. की जयंती के उपलक्ष्य में सामायिक दिवस का आयोजन किया गया। साध्वीश्री ने कहा कि गुरुदेव श्रमण संघ के प्रति पूर्ण निष्ठावान संत थे। 

उनके अंदर गुणों का भंडार था। पुष्करमुनिजी जहां जहां पर भी गए वहां धर्म ध्वजा लहराई। संतश्री समाधि के सच्चे साधक थे। गुरु से हमें शिक्षा से दीक्षा प्राप्त की। गुरुदेव के मार्गदर्शन में जीवन का मार्गदर्शन पाया। 

साध्वीश्री ने कहा कि जीवन में हमें सुखी रहना चाहिए। हर परिस्थिति में सम रहना चाहिए। सुख और दुख में सम रहना ही आत्मा की विजय है। इस मौके पर बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। सभा का संचालन सुखबीर कोठारी ने किया।

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