बेंगलूरु। मात्र २८ वर्ष की उम्र में वर्ष-१९९६ में लोकसभा सदस्य बनने वाले अनंत कुमार दत्तात्रेय हेग़डे उत्तर कर्नाटक संसदीय क्षेत्र से पांच बार के सांसद हैं और अब ४९ वर्ष की उम्र में वे केन्द्र की मोदी सरकार में मंत्री बने हैं। हेग़डे का मंत्री बनना एक प्रकार से सबके लिए चौंकाने वाली खबर रही क्योंकि मंत्री पद की शपथ लेने के करीब बारह घंटे पूर्व तक मीडिया में उनके नाम की कोई चर्चा नहीं थी। यहां तक कि भाजपा नेताओं की ओर से भी हेग़डे के नाम पर कोई कयास नहीं लगाया गया था लेकिन अपने चौंकाने वाले निर्णय के कारण हमेशा सुर्खियों में रहने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने एक बार फिर से अनंत कुमार हेग़डे को अपने मंत्रिमंडल में जगह देकर सबको चौंका दिया है। युवावस्था में लोकसभा पहुंचे हेग़डे अब तक ११वीं, १२वीं, १४वीं, १५वीं और मौजूदा १६वीं लोकसभा के सदस्य के रूप में एक अनुभवी सांसद हैं। हेग़डे की वरिष्ठता ने मंत्री बनने के मुद्दे पर विजय हासिल की क्योंकि कर्नाटक से आधे दर्जन से ज्यादा अन्य भाजपा सांसदों के नाम पर चर्चा थी जिनके बारे में अटकलें लगाई जा रही थीं कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव-२०१८ को ध्यान में रखकर कर्नाटक से दो या तीन सांसदों को शामिल किया जा सकता है। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने एक बार फिर सबको चौंकाते हुए हेग़डे को मौका दिया। वे अब तक विदेश मामलों और मानव संसाधन विकास तथा संसदीय स्थायी समिति के सदस्य थे। इसके अतिरिक्त संसद में अपने लम्बे कार्यकाल के दौरान वह वित्त, गृह मामलों, मानव संसाधन विकास, वाणिज्य, कृषि और विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समितियों के सदस्य रह चुके हैं इसके अतिरिक्त चार बार मसाला बोर्ड के सदस्य रहे हैं। इस लिहाज से हेग़डे के पास काम करने का लम्बा अनुभव है। ्यप्थ्य्द्मफ्द्नय् घ्रुद्मय्प् झ्द्य द्मज्द्यकर्नाटक में अगले वर्ष के आरंभ में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अनंत कुमार हेग़डे का मंत्री बनना बेहद अहम माना जा रहा है। वे ब्राह्मण जाति से आते हैं और भाजपा को हमेशा से अग़डी जातियांे का समर्थन मिलता रहा है। मौजूदा समय में कर्नाटक से केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल अनंत कुमार, सदानंद गौ़डा और रमेश जिगजिनागी दक्षिण कर्नाटक से आते हैं जबकि निर्मला सीतारमण राज्यसभा की सदस्य हैं। वहीं भाजपा को दक्षिण कर्नाटक की तुलना में उत्तर कर्नाटक में ज्यादा मजबूत माना जाता है। इसलिए अनंत कुमार हेग़डे को मंत्रिमंडल में जगह देकर उत्तर कर्नाटक को एक संकेत देने की कोशिश की गई है। हेग़डे के मंत्री बनने से अब कर्नाटक से केन्द्र में कुल पांच मंत्री हो गए हैं। केन्द्र में किसी एक राज्य से पांच मंत्री होना बेहद महत्वपूर्ण होता है और कर्नाटक में दोबारा सत्ता में वापसी करने की मंशा पाले भाजपा इससे स्पष्ट संकेत देना चाहती है कि केन्द्र में कर्नाटक की उपेक्षा नहीं की गई है। ब्ष्ठख्ठ्ठणक्कष्ठ द्मष्ठ यर्‍ ्यब़्ख्रर्‍ द्बष्ठ्र प्रय्झ्त्र्अंनत कुमार हेग़डे ने मंत्री पद की शपथ हिन्दी में ली जबकि वे अहिन्दी भाषी प्रदेश कर्नाटक से आते हैं। संयोग से हेग़डे ने उस समय हिन्दी में शपथ ली है जब कर्नाटक में हिन्दी का विरोध किया जा रहा है। बेंगलूरु में हिन्दी का कई स्तरों पर विरोध हो चुका है और राज्य सरकार ने केन्द्र पर गैर हिन्दी भाषी राज्यों पर हिन्दी थोपने का आरोप लगाया है। ऐसे में हेग़डे का हिन्दी में शपथ लेना आने वाले समय में कर्नाटक में एक राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।