चेन्नई। मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और उप मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के ध़डों का विलय हो चुका है लेकिन सत्तारुढ अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक) की मुश्किलें कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। दिनाकरण के नेतृत्व में पार्टी के तीसरे गुट के उभरने के बाद सरकार अल्पमत में आ चुकी है। इन सबके बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता दिल्ली पहुंच गए हैं। ऐसा कहा जा रहा है कि पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह वापस लेने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेता नई दिल्ली गए हैं। दिल्ली में मौजूद अन्नाद्रमुक नेताओं में राज्य के मत्स्य मंत्री डी जयकुमार, मंत्री सीवी षन्मुगम, पी तंगमणि और अन्नाद्रमुक के सांसद मैत्रेयन और मनोज पांडियन शामिल हैं। मैत्रेयन और मनोज पांडियन ने मंगलवार को केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात की।नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत में मैत्रेयन ने कहा कि उनकी योजना चुनाव आयोग से मिलने की है। हालांकि सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा अभी तक पार्टी के नेताओं को मिलने का समय नहीं दिया है। इसी क्रम में दिनाकरण के समर्थक पुगझेंदी और पूर्व सांसद अनबझगन ने मंगलवार को चुनाव आयोग को एक याचिका सौंप कर अनुरोध किया कि पार्टी के दो पत्तियों वाले चुनाव चिन्ह और पार्टी का नाम आवंटित करने से पहले उनसे सलाह ली जाए। निर्वाचन आयोग के अधिकारियों को याचिका सौंपने के बाद पत्रकारों से बातचीत में पुगझेंदी ने कहा कि सभी को निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देशों का पालन करना चाहिए और मुख्यमंत्री पलानीस्वामी पार्टी के नाम और लेटरहेड का उपयोग कर इसके दिशा निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा चुनाव आयोग को हाल के दिनों में पार्टी के पदों में हुए बदलावों के बारे में अवगत कराया गया है। मंगलवार को अन्नाद्रमुक के गठबंधन मेंे शामिल पार्टी के विधायक करुणास और तमिमुम अंसारी ने मंगलवार को राज्य सचिवालय में जाकर मुख्यमंत्री पलानीस्वामी से मुलाकात की। इन दोनों विधायकों ने बताया कि वह राजीव गांधी हत्याकांड के दोषी पेरारिवलन को पैरोल पर रिहा करने की अनुमति देने के लिए मुख्यमंत्री को धन्यवाद देने के लिए उनसे मिलने गए थे। इन विधायकों ने कहा कि अगर विधानसभा में विश्वासमत पारित होता है तो किसका समर्थन करना है इसके बारे में वह समय आने पर निर्णय लेंगे। उन्होंने कहा कि दिनाकरण और वीके शशिकला को पार्टी से बाहर करने पर पार्टी के टूटने का डर है। विधायकों ने कहा कि वह गठबंधन पार्टी में होने के कारण अन्नाद्रमुक के अंदरुनी मामलों में कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं। हालांकि हमारी इच्छा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता राज्य के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए आपसी मतभेदों को भुलाकर एक हो जाएं। विधायक करुणास ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी राज्य की द्रवि़ड पार्टियों को तो़डने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने सबसे पहले अन्नाद्रमुक में दरार पैदा करने की कोशिश की है।