इफ्तार के आयोजन से पेजावर मठ के मठाधीश आलोचनाओं से घिरे

स्वामी विश्वेशतीर्थ ने इसे दो समुदायों के बीच सद्भाव का प्रयास बताया

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बेंगलूरू। मठ के इतिहास में पहली बार ईद की पूर्व संध्या पर मुस्लिम समुदाय के लिए इफ्तार का आयोजन करने से पेजावर मठ के मठाधीश श्री विश्वेश तीर्थ स्वामी आलोचना का शिकार हुए हैं्। १५० मुसलमानों ने मंदिर में आयोजित इस इफ्तार पार्टी में हिस्सा लिया। हालांकि स्वामीजी ने कहा, उन्होंने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को आहत करने के लिए कुछ भी गलत नहीं किया है, बल्कि उन्होंने हिंदू धर्म की सहिष्णुता और सद्भाव की आस्था को बरकरार रखा है। हिंदू नेता प्रमोद मुतालिक ने स्वामी की निंदा करते हुए कहा कि इससे हिंदू समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं। हालांकि, भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री डी वी सदानंद गौ़डा सहित अन्य लोगों ने स्वामीजी के इस भाव का स्वागत किया और कहा कि यह सांप्रदायिक सौहार्द का एक बि़ढया उदाहरण है। उन्होंने मुसलमानों के एक समूह को रोजा खोलने के लिए बुलाया था और प्राचीन उडुपी श्रीकृष्ण मंदिर के परिसर में एक ’’सौहार्द उपहार कूट’’ का आयोजन किया जो कि इतिहास में पहली बार हुआ है। विश्वेश तीर्थ स्वामीजी ने कहा कि उन्होंने मुतालिक के साथ ४० मिनट की मुलाकात की और उन्हें समझाया कि वह समुदायों के बीच के अंतर को पाटने का प्रयास कर रहे हैं। मुतालिक का दावा है कि मठ ने हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, जो गलत है। स्वामी ने इस आरोप से इनकार किया कि मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को मठ परिसर में नमाज प़ढने की अनुमति दी गई थी। बी़फ के सेवन पर उन्होंने कहा कि केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि दूसरे लोग भी हैं जो गोमांस खाते हैं। बी़फ का सेवन करने मात्र से लोगों को मंदिर में प्रवेश करने से रोका नहीं जा सकता। सदानंद गौ़डा ने यहां कहा कि विश्वेश तीर्थ स्वामीजी का मुस्लिमों को इफ्तार के लिए आमंत्रित करना कुछ गलत नहीं था और यह समाज की भलाई के लिए एक भावनात्मक मुद्दा था। उन्होंने कहा कि नेता रमजान त्योहार के दौरान टोपी पहनते हैं और मीडिया को पो़ज देते हैं लेकिन स्वामीजी ने यह रोजा इफ्तार दिखावे के लिए नहीं किया है बल्कि उन्होंने सांप्रदायिक सद्भाव के महत्व को बनाए रखने के लिए किया था।

फाइल फोटो