बेंगलूरु। रक्षा विमानन प्रमुख एचएएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक टी सुवर्णा राजू ने शुक्रवार को कुमुदावती नदी कायाकल्प परियोजना को बेंगलूरू ग्रामीण जिले की ग्राम पंचायत को सौंप दिया। वर्ष २०१६-१७ में सीएसआर गतिविधियों के तहत ३५ गांवों के लिए तेप्पागाबेगुरू मिनी वाटर शेड लागू किया गया था। इसको परियोजना से सूखा प्राकृतिक जल संसाधनों और क्षेत्र के प्राकृतिक वास को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि परियोजना को सौंपने का आयोजन अराशिनाकुंटे गांव में हुआ्। तेप्पागाबेगुरू में कायाकल्प कार्य के तहत पौधारोपण (५०००), कुओं का रिचार्जिंग (७९) और बोरवेल (९), जल पूल (१५) और बोल्डर चेक (७९) के निर्माण में शामिल हैं। कुल मिलाकर पिछले तीन वर्षों में एचएएल ने २० हजार पौधे लगाए, ५० पानी के पूल बनाए, ३६ बोरेवेल और २८१ कुओं को रिचार्ज किया। इस क्षेत्र में बोल्डर-चेक (२८१) के साथ तावरकेरे, थायमागोंड्लू, मोंडिगेयर, तेप्पागाबेगुरू मिनी वॉटरशेड को भी शामिल किया। कुमुदावती अर्कावती नदी की एक सहायक नदी है और बेंगलूरु ग्रामीण जिले के नेलमंगला तालुक में शिवांज पर्वत से निकलती है। अर्कावती और कुमुदावती दोनों ही तिप्पेगोंडनहल्ली जलाशय में मिलती हैं, जो तीन दशक पहले से बेंगलूरू की ३०-४० फीसदी जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं।वर्तमान में कुमुदावती से पानी ला बहुत कम प्रवाह है। एचएएल अपने सीएसआर के हिस्से के रूप में इंटरनेशनल एसोसिएशन ऑफ ह्यूमन वैल्यू (आईएएचवी) के माध्यम से मिनी वॉटरशेड के कायाकल्प का काम प्रायोजित कर रहा है। कायाकल्प के तहत मृत बोरवेलों और खुले कुओं के पुनरुद्धार में मदद करता है और पीने के पानी के स्रोतों की रक्षा करता है।