बेंगलूरु। इस महीने के पहले ही दिन पूरे देश को एक बाजार का रूप देकर पूरे देश में एक ही कर ढांचा लागू यानी माल और सेवा कर (जीएसटी) लागू किए जाने के बाद उद्योग व्यवसाय जगत में कई प्रकार की आशंकाएं बनी हुई हैं्। देश के शीर्ष औद्योगिक संगठनों ने जीएसटी की लांचिंग का विरोध भी किया था। वहीं, शुरक्रवार को इन आशंकाओं को निराधार बताते हुए केंद्रीय एमएसएमई मंत्री कलराज मिश्र ने कहा कि इस कर प्रणाली से लघु, सूक्ष्म ओर मध्यम स्तर के उद्योगों को किसी प्रकार का नुकसान नहीं उठाना होगा। उल्टे इस स्तर के उद्योगों और उद्यमियों के विकास में यह कर प्रणाली काफी मददगार साबित होगी। वह आज यहां सातवें भारतीय स्टील हाउसवेयर शो को संबोधित कर रहे थे। मिश्र ने कहा कि केंद्र सरकार ने एमएसएमई उद्योगों की शिकायतों का निपटारा करने के लिए एक विशेष मंच गठित किया है। इस मंच पर रखी जानेवाली जीएसटी से जु़डी हर शिकायत का निस्तारण संतोषजनक ढंग से किया जाएगा। इसके साथ ही एमएसएमई मंत्रालय की वेबसाइट पर जीएसटी के संबंध में उठाए जानेवाले हर सवाल का जवाब देने वाला लिंक मुहैया करवाया गया है।उन्होंने कहा कि युवा शिक्षित वर्ग को रोजगार के अवसर प्राप्त करने के योग्य बनाने के लिए उनका मंत्रालय हर वर्ष १५ लाख युवक-युवतियों को विशेष प्रशिक्षण मुहैया करवाएगा। इसके लिए वर्ल्ड बैंक की मदद से देश भर में १५ नए टूल रूम्स खोले जा रहे हैं। इसमें २५०० करो़ड रुपए निवेश किए जाएंगे। वहीं, सरकार ने एमएसएमई ट्रस्ट का फंड भी ब़ढाया है। अब इस ट्रस्ट के पास एमएसएमई उद्योगों की मदद के लिए ७५०० करो़ड रुपए उपलब्ध हैं। अब इस ट्रस्ट से उद्योग जगत को मिलने वाला वित्तीय समर्थन भी एक करो़ड से ब़ढाकर दो करो़ड रुपए तक कर दिया गया है। मंत्रालय ने बैंकों से कहा है कि वह एमएसएमई इकाइयों के लिए ऋण की सीमा २० प्रतिशत से ब़ढाकर २५ प्रतिशत करें और कैपिटल एडवांस की सीमा भी २० प्रतिशत से ब़ढाकर ३० प्रतिशत कर दें्। इस कदम से सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम स्तर की औद्योगिक इकाइयों को अपनी प्रणालियों में बेहतर तकनीक का प्रयोग शुरू करने में मदद मिलेगी।मिश्र ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपनों की परियोजना मेक इन इंडिया की शुरुआत अब तक काफी अच्छी रही है और एमएसएमई उद्योग इसे सफल बनाने में अग्रणी भूमि निभा सकते हैं। केंद्र सरकार की इस योजना के तहत देश में निवेश का प्रवाह ब़ढाने, नवाचार को गति देने, दक्षता विकास करने और देश में विनिर्माण को ब़ढावा देने के लिए बेहतर ढांचा तैयार करने पर ज्यादा ध्यान दिया जा रहा है।मिश्र ने स्वीकार किया कि देश के आर्थिक विकास में एमएसएमई उद्योग जगत की भूमिका काफी महत्वपूर्ण है। इस उद्योग जगत ने साल दर साल दस प्रतिशत तक का विकास दर्ज किया है। इन उद्योगों में खादी और निवा़ड क्षेत्र भी शामिल हैं। इस उद्योग जगत ने कृषि के बाद सबसे अधिक (१११.२३ मिलियन) लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए हैं। उन्होंने आंक़डों के हवाले से कहा कि एमएसएमई सेक्टर देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में ३०.७१ प्रतिशत की भागीदारी करता है, जबकि देश के सकल मूल्य वर्धित उत्पाद (जीवीए) में ३३.३४ प्रतिशत, सकल विनिर्मित उत्पाद में ३३.४० प्रतिशत और सकल निर्यात में ४५ प्रतिशत की भागीदारी करता है। केंद्रीय मंत्री ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम का संदर्भ लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को पूरी दुनिया के विनिर्माण केंद्र का रूप देना चाहते हैं्। इसके साथ ही देश की जीडीपी वृद्धि दर को १० प्रतिशत तक पहुंचाना उनका सपना है। इसके लिए सरकार एमएसएमई सेक्टर को हरसंभव प्रोत्साहन देने को तैयार है, क्योंकि यही देश के विकास का इंजन है। ह्वाइटफील्ड में आज से शुरू हुए इस शो में एक ही छत के नीचे देशभर के मैन्युफैक्चरर्स, ट्रेडर्स, रिटेलर्स, होलसेलर्स, डिस्ट्रीब्यूटर्स और अन्य लोग भाग ले रहे हैं।