बेंगलूरु/नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक के पुलिस उपाधीक्षक एम के गणपति की मौत के मामले की केन्द्रीय जांच ब्यूरो को जांच का आदेश देते हुए मंगलवार को कहा कि इस मामले की निष्पक्ष तरीके से जांच की जरूरत की ओर इंगित करने वाले चौंकाने वाले तथ्य हैं। पुलिस उपाधीक्षक गणपति की पिछले साल सात जुलाई को कर्नाटक के मडिकेरी में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल और न्यायमूर्ति उदय यू ललित की पीठ ने मृतक पुलिस अधिकारी के पिता एम के कुशलप की याचिका पर यह आदेश दिया। पीठ ने कहा, इस मामले में कुछ चौंकाने वाले तथ्य हैं। यह हत्या है या आत्महत्या, इसकी निष्पक्ष तरीके से जांच कराने की आवश्यकता है। इसके साथ ही पीठ ने तीन महीने के भीतर जांच की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का भी सीबीआई को निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि वह न तो अपराध के स्वरूप का निर्धारण कर रही है और न ही इस बात का कि कौन दोषी है। पीठ ने सीबीआई जांच का आदेश देते हुए कहा कि जनता के भरोसे और सामाजिक आवश्यकता की मांग है कि दोषी व्यक्तियों तक पहुंचा जाए। कर्नाटक सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सीबीआई से जांच कराने के अनुरोध का यह कहते हुएविरोध किया था कि इस मामले में पहले ही विस्तार से जांच की जा चुकी है। इस बीच मंगलवार को बेंगलूरु में भाजपा नेताओं ने बेंगलूरु विकास मंत्री केजे जार्ज के इस्तीफे की मांग की। गणपति की मौत के बाद एक वीडियो टेप जारी हुआ था जिसमें यह दावा किया गया था कि मृत्यु से पहले गणपति ने केजे जार्ज और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी एएम प्रसाद तथा प्रणब मोहंती पर उसे प्रताडित करने के आरोप लगाए थे।