चेन्नई। उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू भारत के उप राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण करने के बाद पहली बार रविवार को चेन्नई पहुंचे। चेन्नई पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और उप मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने उनका स्वागत किया। उन्होंने इस अवसर पर अन्ना विश्वविद्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा शुरु किए गए भारत छो़डो आंदोलन की ७५वीं वर्षगांठ पर आयोजित एक कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में स्थित राष्ट्रपति महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने अन्ना विश्वविद्यालय के शिक्षकों और विद्यार्थियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने एक अहिंसा आधारित लोकतंत्र की कल्पना की थी जिसमें सभी को समान अधिकार हो। इसमें हर कोई स्वतंत्र हो और अपना मालिक स्वयं हो। महात्मा गांधी ने कहा था कि मैं आज आप सभी लोगों को इस प्रकार के लोकतंत्र के निर्माण में शामिल होने का आह्वान करता हूं। जब आप ऐसा समझेंगे तो आप यह भी समझ जाएंगे कि हम सभी हिन्दू या मुसलमान नहीं है बल्कि हम सभी एक भारतीय हैं और हमारी स्वतंत्रता की ल़डाई भी एक ही है। उप राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी ने वर्ष १९४२ में प्रगति मैदान से भारत छो़डो आंदोलन की शुरुआत करते हुए यह बात कही थी।राष्ट्रपिता की इन बातों ने देश के सभी युवाओं में नए उत्साह का संचार कर दिया था और वह आजादी के इस अभियान में उनके साथ आ गए। गांधीजी के इस आह्वान के बाद अमीर या गरीब, किसान हों या महिलाएं सभी उनके साथ आने लगे और इससे ब्रिटिश सरकार घबरा गई। इसके बाद महात्मा गांधी ने करो या मरो का नारा दिया जिससे अंग्रेजी शासन की चूलें हिल गईं और उन्होंने भारतीय लोगों का दमन करना शुरु कर दिया। पांच वषार्ें तक अंग्रेजी शासन की इस दमनकारी नीति के बाद आखिरकार ब्रिटिश सरकार को भारत को स्वतंत्र करने का निर्णय लेना ही प़डा।आज वह समय आ गया है जब हर एक भारतीय को ठीक उसी प्रकार की एकजुटता सांप्रदायिकता, जातिवाद, काला धन, लिंग के आधार पर होने वाले भेदभाव और समाज के कमजोर वर्ग के लोगों के साथ होने वाले अत्याचार के विरोध में दिखाएं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रश्न किया कि क्या सभी भारतीयों को महात्मा गांधी के रामराज्य की कल्पना को पूरा करने के लिए प्रतिज्ञा नहीं लेनी चाहिए? क्या हमें भारत को एक ऐसा भारत बनाने की दिशा में काम नहीं करना चाहिए जिसका स्वप्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर और दीनदयाल उपाध्याय ने देखा था? हालांकि इसके लिए सवाल उठ सकते हैं लेकिन हमें आगे बढना है और एक स्वच्छ और एक नया भारत बनाने के लिए आगे आने होगा।भारत के राष्ट्रपिता और हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने हमें आजादी दिलवाई लेकिन भारत की आजादी के ७० वर्षों के बाद भी हम भ्रष्टाचार, क्षेत्रवाद, धार्मिक कट्टरवाद, अशिक्षा, कन्या भ्रूण हत्या और दहेज के कारण होने वाली हत्याओं जैसी सामाजिक बुराइयों से ल़ड रहे हैं। हमें इन सभी बुराइयों को समाप्त करने के लिए एकजुट होने की आवश्यकता है। आज देश की आबादी का एक ब़डा हिस्सा युवा है और उनकी ऊर्जा का उपयोग देश को विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादनशील बनाने के लिए किया जाना चाहिए।उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने देश को यह दिखाया है कि हम आधुनिक होते हुए भी अपनी परंपराओं से किस प्रकार जु़डे रह सकते हैं। तमिलनाडु एक ऐसी धरती है जिसने साहित्य से लेकर संगीत तक विभिन्न शख्सियतों को जन्म दिया है। वीरापांडियन कट्टबोमण, सुब्रमण्या भारती और चिदंबरम पिल्लैवेयर जैसे स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों से ल़डाई के दौरान अंग्रिम पंक्ति में रहेे। इसके साथ ही यह भारत के पहले गवर्नर जनरल सी राजगोपालचारी और देश के तीन राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डा आर वेंकटरमण और डॉ एपीजे अब्दुल कलाम भी इसी धरती से थे। उन्होंने कहा कि जाने माने शास्त्रीय गायक एम एस सुब्बुलक्ष्मी, ख्यातीलब्ध संगीतकार और चेस के विख्यात खिला़डी विश्वनाथन आनंद भी तमिलनाडु से ही हुए हैं जिन्होंने देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया। इसके साथ ही कामराज और अन्नादुरै जैसे राजनेताओं के साथ ही कई अन्य राजनेताओं ने अपनी दूरदर्शिता और नेतृत्व क्षमता से देश और राज्य का विकास किया है।