बेंगलूरु। विपक्षी भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने गुरुवार को कर्नाटक विधान परिषद में राज्य सरकार से शराब पर प्रतिबंध लगाने की मांग की। इस मुद्दे को उठाते हुए विधान परिषद में नेता विपक्ष के एस ईश्वरप्पा ने आरोप लगाया कि सिद्दरामैया सरकार शराब लॉबी का समर्थन कर रही है इसलिए शहर और कस्बों में शराब की दुकानों को बंद करने का आदेश नहीं दिया गया। इस आरोप को ख़ारिज करते हुए मुख्यमंत्री सिद्दरामैया ने कहा कि प्रदेश राष्ट्रीय राजमार्ग के ५०० मीटर के दायरे में बॉर बंद करने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में पहले ही दिशानिर्देश जारी किए गए हैं और सरकार सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश का उल्लंघन नहीं करेगी। ईश्वरप्पा ने आरोप लगाया कि शराब की दुकानों को बंद करने में विफल राज्य सरकार के कारण गरीब परिवार परेशान हैं जिस पर सत्ता और विपक्षी सदस्यों के बीच बहस होने लगी। सिद्दरामैया ने कहा, उनकी सरकार न तो शराब के पक्ष में है और न ही इसके खिलाफ है। हर कोई जानता है कि इसको पीना स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है, लेकिन लोगों को पीने से रोकना भी संभव नहीं है इसलिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं और वे किसी भी लॉबी के पक्ष में नहीं हैं। यह गलत धारणा है कि शराब पर प्रतिबंध से सब सही हो जायेगा। सस्ती शराब की बिक्री से हजारों लोगों का जीवन प्रभावित हो चुका है और उनका पुनर्वास नहीं हुआ है। उन्होंने विपक्ष को चुनौती दी कि यदि आप शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध में रुचि रखते हैं, तो इसे भाजपा शासित राज्यों में पहले लागू किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट ईश्वरप्पा के नेतृत्व में भाजपा सदस्यों ने विधानपरिषद से बहिर्गमन किया।