चेन्नई। कंफेडरेशन ऑफ रियल इस्टेट डेवलपर्स ऐसोसिएशन ऑफ इंडिया (के्रडई) के चेन्नई चैप्टर के सदस्यों ने गुरुवार को रेत की कमी के कारण राज्य में निर्माण उद्योग से जु़डे लोगों के समक्ष आ रही समस्याओं के समाधान की मांग के साथ विरोध प्रदर्शन करते हुए एक दिन की भूख ह़डताल की। इस विरोध प्रदर्शन में लगभग २०० रियल इस्टेट डेवलपरों ने हिस्सा लिया। इस विरोध प्रदर्शन का विभिन्न रियल इस्टेट कंपनियों और बिल्डरों द्वारा समर्थन किया गया था।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकार ने मई महीने में कहा था कि अगले १५ दिनों में रेत खनन के लिए १५ खदानों को खोल दिया जाएगा। रियल एस्टेट व्यापारियों द्वारा रेत की कमी की समस्या को उठाए जाने के बाद राज्य सरकार ने यह आश्वासन दिया था कि रेत का वितरण सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत सुनिश्चित किया जाएगा। हालांकि उसके बाद से लेकर अभी तक इस कमी से निपटने के लिए कुछ भी नहीं किया गया है। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पहले राज्य में प्रति ४०,००० ट्रक रेत की बिक्री राज्य में होती थी मगर मौजूदा समय में प्रति दिन मात्र ४००० ट्रक रेत की बिक्री ही हो पा रही है। इसके साथ ही सरकार ने नदियों के रेत के विकल्प के तौर पर जिस पत्थर से निर्मित रेत को बेचने की बात कही थी उसकी बिक्री भी शुरु नहीं की गई है।इस अवसर पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान क्रेडई चेन्नई के अध्यक्ष सुरेश कृष्ण ने कहा कि राज्य सरकार ने राज्य में रेत का वितरण बढाने की दिशा में कोई समुचित कदम नहीं उठाया है। सरकार द्वारा रेत की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कोई कदम नहीं उठाने के कारण कई भवन निर्माण परियोजनाएं अटक गई है। समय बीतने के साथ ही इन परियोजनाओं के लागत में भी बढोत्तरी होगी जिसके कारण राज्य में निर्माण उद्योग से जु़डे लोग चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि हम लोग यहां पर रेत खनन पर राज्य की मौजूदा स्थिति की निंदा करने के लिए एकजुट हुए हैं। कृष्णन ने कहा कि हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि रेत की कमी के कारण राज्य में निर्माण उद्योग के समक्ष आ रही समस्याओं का समाधान करने की दिशा में तत्काल कदम उठाया जाए।