चेन्नई। अखिल भारतीय अन्ना द्रवि़ड मुनेत्र क़डगम (एआईएडीएमके) के दोनों ध़डों का विलय हो गया है। एक ध़डे का नेतृत्व मुख्यमंत्री पलनीसामी और दूसरे का पूर्व मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम कर रहे थे। विलय के बाद पन्नीरसेल्वम ने राज्य के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। राज्यपाल चौधरी विद्यासागर राव ने पन्नीरसेल्वम को शपथ दिलाई। पन्नीरसेल्वम के अलावा के. पंडियाराजन ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ली। विलय के बाद दोनों ध़डों के नेताओं ने कहा था कि दोनों पक्षों की सारी मांगें पूरी हो गई हैं।ऐसा माना जा रहा है कि विलय की घोषणा हो जाने के बाद अब अन्नाद्रमुक की महासचिव वीके शशिकला के खिलाफ एक प्रस्ताव पारित हो सकता है। उल्लेखनीय है कि पार्टी के नियमों के अनुसार, महासचिव को किसी समिति या पार्टी पदाधिकारियों के एक समूह द्वारा प्रस्ताव पारित कर पद से हटाया नहीं जा सकता। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस बाधा को दूर करने और पार्टी के मामलों के संचालन के लिए एक संचालन या सलाहकार समिति गठित की जाएगी, जिसमें दोनों ध़डों का प्रतिनिधित्व होगा। इसके लिए सलाहकार समिति के निर्णयों को जनरल काउंसिल से मंजूरी लेनी होगी। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता को पार्टी की स्थाई महासचिव बनाए रखते हुए पार्टी महासचिव का पद समाप्त भी किया जा सकता है। ऐसा करने के लिए पार्टी के नियमों में संसोधन करने पर भी विचार किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पन्नीरसेल्वम ने विलय के लिए पलानीसामी के समक्ष जो मांगे रखी थी उसमें पार्टी की मौजूदा महासचिव वीके शशिकला और उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरण सहित परिवार के सभी लोगों को पार्टी से बाहर करने की मांग प्रमुख थी। पन्नीरसेल्वम के ध़डे के नेताओं की ओर से यह कहा जा रहा है कि इस दिशा में जल्द ही कदम उठाया जा सकता है।इस विलय के बाद पन्नीरसेल्वम को पार्टी की कमान मिलने की संभावना है। सूत्रों के अनुसार पार्टी का संचालन करने के लिए सलाहकार समिति का गठन करने के लिए जल्द ही दोनों ध़डों के नेता पन्नीरसेल्वम और पलानीसामी की मौजूदगी में बैठक कर सकते हैं। इस विलय के बाद इस बात की भी संभावना प्रकट की जा रही है कि दिनाकरण का समर्थन करने वाले विधायक पार्टी से किनार कर सकते हैं। लगभग दस विधायक दिनाकरण के समर्थन में हैं।