चेन्नई। मुख्यमंत्री पन्नीरसेल्वम ने कहा है कि राज्य सरकार तमिलनाडु शास्त्रीय संस्थान को स्थानांतरित करने के खिलाफ है। मुख्यमंत्री ईडाप्पाडी के पलानीसामी इस उच्च स्वायत्त संस्थान के गवर्निंग बोर्ड का नेतृत्व भी करते हैं। द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) ने हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा सत्र के दौरान इस मुुद्दे को उठाया था। मीडिया के एक वर्ग में इस प्रकार की खबरें आ रही थी कि केन्द्र सरकार इस प्रतिष्ठित संस्थान को तिरुवरुर से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना बना रही है। इसके बारे में मुख्यमंत्री ने उस समय विधानसभा में यह जवाब दिया था कि न तो उन्हें और न ही उनकी सरकार को इस संबंध में कोई सूचना मिली है।बुधवार को मुख्यमंत्री पलानीसामी ने अपने कार्यालय में इस संस्थान के पांचवे गवर्निंग बोर्ड का गठन किया। सरकार की ओर से एक विज्ञप्ति जारी कर इस बात की जानकारी दी गई है। विज्ञप्ति में बताया गया है कि हाल के दिनों में मीडिया के एक वर्ग में इस प्रकार की खबरें आ रही थी कि इस स्वायत्त विश्वविद्यालय को केन्द्रीय विश्वविद्यालय के अधीन लाकर इसे राज्य से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। हालांकि संस्थान के गवर्निंग बोर्ड ने एकमत के साथ इस संस्थान को राज्य से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित नहीं करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही बोर्ड ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय से इस संस्थान में तमिल से संबंधित नए शोध कार्यों को शुरु करने के लिए अतिरिक्त राशि प्राप्त करने के लिए अनुरोध करने का निर्णय लिया है। ज्ञातव्य है कि कांग्रेस की नेतृत्व वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने वर्ष २००४ में तमिल भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया था। इससे पूर्व संस्थान का संचालन केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर के परिसर में हो रहा था और इसे शास्त्रीय तमिल भाषा उत्कृष्टता केन्द्र के रुप में जाना जाता था। द्रवि़ड मुनेत्र कषगम के प्रमुख करुणानिधि के प्रयासों के कारण इस संस्थान को १९ मई २००८ को चेन्नई स्थानांतरित किया गया था। करुणानिधि इस संस्थान के गवर्निंग बोर्ड के प्रथम चेयरपर्सन बने थे।