चेन्नई। द्रमुक के कार्यकारी अध्यक्ष एवं तमिलनाडु के विपक्ष के नेता एमके स्टालिन ने श्रीलंका में रह रहे तमिलों के अधिकारों की हिफाजत के लिए रविवार को संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार संगठन से हस्तक्षेप करने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त केटी गिलमोर को भेजे पत्र में स्टालिन ने आरोप लगाया कि २००९ में संकट के तेज होने के साथ श्रीलंकाई सशस्त्र बलों ने मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन किया।उन्होंने कहा, लाखों तमिल (तब से) अब भी लापता हैं और श्रीलंकाई सरकार ने उन्हें तलाशने के लिए किसी सकारात्मक तंत्र का विकास नहीं किया है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि युद्ध अपराधों की स्वतंत्र एवं विश्वसनीय जांच के लिए संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप के बावजूद भी श्रीलंका सरकार ने इस संबंध में कुछ नहीं किया। उन्होंने सरकार पर मानवाधिकारों से जु़डे सभी समझौतों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए श्रीलंकाई सेना पर तमिल प्रभुत्व वाले इलाकों में जमीन के ब़डे हिस्से पर अतिक्रमण करने का दावा किया। स्टालिन ने कहा, इसलिए श्रीलंका में तमिलों की सुरक्षा के लिए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद का निजी हस्तक्षेप बेहद जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय न्यायालयों द्वारा तमिलों के प्रति किए गए कथित युद्ध अपराधों की विश्वसनीय स्वतंत्र जांच पर जोर देते हुए कहा कि उन लोगों के लिए एक सार्थक राजनीतिक हल भी जरूरी है जो लंबे समय से लंबित है। स्टालिन ने कहा, मैं उम्मीद करता हूं कि मानवाधिकार परिषद के (जारी) सत्र में मानवाधिकार मूल्यों को बनाए रखने और साथ ही ईलम तमिलों को मंजूर सार्थक राजनीतिक हल के लिए ईमानदार कोशिशें करेगा।