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कर्नाटक विधानसभा चुनाव लड़ने पर क्या बोले येडियुरप्पा के बेटे विजयेंद्र?
विजयेंद्र ने यहां संवाददाताओं से कहा, कोई भ्रम नहीं है, मेरे पिता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा का शिकारीपुरा निर्वाचन क्षेत्र से बहुत घनिष्ठ संबंध है
 
येडियुरप्पा ने अपनी चुनावी राजनीति के अंत का संकेत देते हुए गत शुक्रवार को कहा था कि वे शिवमोगा जिले की अपनी शिकारीपुरा विधानसभा सीट खाली कर देंगे और विजयेंद्र वहां से चुनाव लड़ेंगे

कोप्पल/भाषा। पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा के बेटे एवं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने सोमवार को कहा कि अगर केंद्रीय नेतृत्व ने मंजूरी दी तो वे 2023 का राज्य विधानसभा चुनाव लड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व उनकी उम्मीदवारी के संबंध में उचित समय पर निर्णय लेगा और येडियुरप्पा ने लोगों के दबाव में उन्हें चुनाव के लिए पारिवारिक गढ़ शिकारीपुरा से उम्मीदवार के रूप में घोषित किया लेकिन इसके लिए पार्टी की मंजूर जरूरी है।

विजयेंद्र ने यहां संवाददाताओं से कहा, कोई भ्रम नहीं है, मेरे पिता और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा का शिकारीपुरा निर्वाचन क्षेत्र से बहुत घनिष्ठ संबंध है, इसलिए पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं और क्षेत्र के लोगों के दबाव में उन्होंने एक घोषणा की। उन्होंने यह भी कहा है कि पार्टी और इसका केंद्रीय नेतृत्व फैसला करेगा।

येडियुरप्पा के छोटे बेटे विजयेंद्र को पूर्व मुख्यमंत्री का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जाता है।

विजयेंद्र ने कहा, ‘...अगर पार्टी ने मंजूरी दी, तो मैं चुनाव लड़ूंगा।’

येडियुरप्पा ने अपनी चुनावी राजनीति के अंत का संकेत देते हुए गत शुक्रवार को कहा था कि वे शिवमोगा जिले की अपनी शिकारीपुरा विधानसभा सीट खाली कर देंगे और विजयेंद्र वहां से चुनाव लड़ेंगे।

लिंगायत नेता ने हालांकि शनिवार को स्पष्ट किया कि केवल पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही चुनाव लड़ने के लिए टिकट पर फैसला कर सकता है।

स्पष्टीकरण उस दिन आया जब मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने येडियुरप्पा से उनके आवास पर मुलाकात की।

यह पूछे जाने पर कि क्या दशकों तक मेहनत कर राज्य में पार्टी को मजबूत बनाने वाले येडियुरप्पा जैसे नेता को अपने निर्वाचन क्षेत्र के लिए राजनीतिक उत्तराधिकारी चुनने की स्वतंत्रता नहीं है, विजयेंद्र ने कहा, ‘यह भाजपा है, एक राष्ट्रीय पार्टी है और इस पार्टी में उत्तराधिकारी का कोई सवाल ही नहीं है।’

पार्टी के भीतर एक वर्ग को लगता है कि यह येडियुरप्पा द्वारा विजयेंद्र के राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने का एक प्रयास हो सकता है। हाल ही में वह अपने बेटे के लिए विधान परिषद का टिकट पाने में विफल रहे थे।

विजयेंद्र को जुलाई 2020 में पार्टी उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था। इससे पहले, उन्हें भाजपा की युवा इकाई के महासचिव के रूप में नियुक्त किया गया था।

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