आशा बिनीश
आशा बिनीश

.. राजीव शर्मा ..

तिरुवनंतपुरम/दक्षिण भारत। कोरोना महामारी के प्रसार को रोकने के लिए लगाए गए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन में हम सबके लिए इंटरनेट बहुत मददगार साबित हुआ। कुछ लोगों ने अपनी सूझबूझ से विज्ञान के इस वरदान का सदुपयोग किया और आज वे प्रगति के पथ पर आगे बढ़ते जा रहे हैं।

केरल निवासी आशा बिनीश (34) यूं तो गृहिणी हैं लेकिन उन्होंने उच्च शिक्षा से अर्जित ज्ञान को इंटरनेट के जरिए पेश कर न केवल कई विद्यार्थियों की मदद की, बल्कि अपनी खास पहचान भी बनाई है। आज वे ऑनलाइन शिक्षा का जाना-पहचाना नाम बन चुकी हैं।

काकनाड निवासी आशा ने जब यूट्यूब पर कॉम्पेटिटिव क्रैकर नाम से चैनल शुरू किया तो उन्होंने कल्पना नहीं की थी कि उनकी यह कोशिश इतनी पसंद की जाएगी। आज उनका टर्नओवर एक करोड़ रुपए के आंकड़े तक जा पहुंचा है।

रसोई की चीजों में विज्ञान के सिद्धांत
आशा का पढ़ाने का तरीका अनूठा है। वे गणित और विज्ञान के जटिल सिद्धांतों को आसान भाषा में समझाने की कोशिश करती हैं। इसके लिए दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली चीजों के उदाहरण पेश करती हैं। मिसाल के तौर पर, अगर विभिन्न प्रकार के एसिड की जानकारी देनी हो तो नींबू, दही और इमली जैसी चीजें लेकर आती हैं। इससे विद्यार्थियों के लिए याद रखना काफी आसान हो जाता है।

एक फैसला.. और बढ़ते गए कदम
आशा ने कंप्यूटर साइंस से बीटेक किया है। उनकी ज़िंदगी सामान्य ढंग से चल रही थी कि उन्होंने एक बैं​क द्वारा आयोजित प्रतियोगी परीक्षा का फॉर्म भरा। तैयारी के दौरान उन्होंने महसूस किया कि कोचिंग में पढ़ाने का तरीका बहुत उबाऊ और पुराना है, जिसे रोचक बनाने के लिए नए प्रयोग किए जाने की जरूरत है।

आशा उस परीक्षा में सफल हुईं लेकिन तैयारी के दौरान अनुभव ने आगे कुछ नया करने की राह खोल दी। उन्होंने 2015 में कुछ वीडियो बनाए और उन्हें यूट्यूब पर पोस्ट किया। हालांकि शुरुआत में लोगों की ओर से कोई उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं आई।

आशा ने इससे हिम्मत नहीं हारी, वे और वीडियो बनाती रहीं। धीरे-धीरे लोगों का ध्यान उनके चैनल की ओर गया। इसके बाद आशा ने तय किया कि वे खुद का कोचिंग संस्थान शुरू करेंगी जिसमें इंटरनेट का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। उन्होंने इसके लिए 30,000 रुपए का निवेश किया।

तकनीक बनी ताकत
आशा ने एर्नाकुलम में किराए पर जगह लेकर पढ़ाना शुरू किया। अभी उनके विद्यार्थियों की संख्या तीन थी। उधर, यूट्यूब पर उनके वीडियो सराहे जाने लगे। आशा को इसका फायदा हुआ। उन्होंने भविष्य को ध्यान में रखते हुए ब्लॉग, मोबाइल ऐप, वॉट्सऐप संपर्क जैसे विकल्प मुहैया कराए।

कोरोना महामारी में जब परंपरागत कोचिंग संस्थान बंद थे, तब आशा की ऑनलाइन कोचिंग केरल के घर-घर पहुंची और उनके चैनल से 3 लाख से ज्यादा लोग जुड़ गए। आशा ने काम बढ़ जाने से टीम बनाई और करीब ढाई दर्जन शिक्षकों को कोचिंग से जोड़ा।

हर पल सीखते रहो
आशा के पति जो पहले एक बड़ी कंपनी में उच्च पद ​पर थे, अब वे कोचिंग के कार्य में सहयोग करते हैं। आशा बताती हैं कि उन्हें तीन बातें पसंद हैं- खाना बनाना, सीखना और सिखाना। मैं इनका इस्तेमाल शिक्षण को आसान और रोचक बनाने के लिए करती हूं। वे कहती हैं कि हर छोटा कदम बड़े सफर में तब्दील हो सकता है, बस हमें नए प्रयोग के साथ सीखने की प्रक्रिया जारी रखनी चाहिए।