कोरोना पॉजिटिव.. प्रतीकात्मक चित्र
कोरोना पॉजिटिव.. प्रतीकात्मक चित्र

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। शहर में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के मद्देनजर कम से कम छह शीर्ष सामाजिक क्लब, जिन्होंने मई के दूसरे सप्ताह से आंशिक संचालन शुरू किया था, ने जुलाई के कम से कम दूसरे सप्ताह तक गतिविधियां बंद करने का फैसला किया है, और कुछ मामलों में अनिश्चित काल के लिए।

जिन क्लबों ने गतिविधियां बंद करने का फैसला किया, वे हैं बॉरिंग इंस्टीट्यूट, सेंचुरी क्लब, केएससीए क्लब, बेंगलूरु सिटी इंस्टीट्यूट, बसवनगुड़ी क्लब और इंडियन जिमखाना क्लब। इन क्लबों ने बुधवार को अपने सदस्यों को सूचना भेजी और शुक्रवार तक बंद कर देंगे।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब कर्नाटक गोल्फ एसोसिएशन (केजीए) के तीन सदस्य कुछ दिन पहले कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे।

इस संबंध में फेडरेशन ऑफ क्लब, कर्नाटक के सचिव एचएस श्रीकांत ने कहा, ‘हमने मंगलवार को बेंगलूरु में स्थिति पर चर्चा की और क्लबों ने बंद करने का फैसला किया।’

मरीजों को हो रही परेशानी
वहीं, बेंगलूरु में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों ने आम जनता की मुश्किलों में इजाफा कर दिया है। अगर कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित हो जाता है तो उसे सरकारी या निजी अस्पताल मेंं बेड मिलने में ही काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

एक महिला ने बताया कि उनके पति को बुखार था जो तीन दिनों तक ठीक नहीं हुआ। इसके बाद जब टेस्ट कराया गया तो बुधवार को रिपोर्ट पॉजिटिव आई। महिला ने बताया कि उन्हें बीबीएमपी या स्वास्थ्य अधिकारियों ने कॉल नहीं किया, जबकि हम दोपहर 12.30 बजे तक निजी अस्पतालों में लगातार कॉल करते रहे।

महिला के मुताबिक, कुछ ने कहा कि उनके पास बिस्तर नहीं हैं, जबकि अन्य जानना चाहते थे कि हमारे पास बीमा है या नहीं। सरकारी अस्पतालों ने हमारा फोन नहीं उठाया। महिला ने बताया कि उनके परिवार में 75 वर्षीय बुजुर्ग पिता भी हैं और उनके स्वास्थ्य की चिंता हो रही है।

इसी प्रकार, कोरोना पीड़ित एक शख्स के परिजन ने भी दिक्कतों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि 56 वर्षीय पिता को बुधवार को कोरोना पॉजिटिव होने की जानकारी दी गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को कॉल किया, लेकिन वहां से जवाब आया कि उन्होंने अभी तक कोरोना उपचार शुरू नहीं किया है।

सामाजिक कार्यकर्ता करीब तीन घंटे तक अपने सभी परिचितों से संपर्क कर बातचीत करते रहे लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। एक रिपोर्ट के अनुसार, बाद में उन्हें एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया।

महामारी में परीक्षा ने बढ़ाई चिंता
इसके अलावा, राज्य 10वीं बोर्ड परीक्षाएं भी शुरू हो गई हैं। कोरोना महामारी के बीच परीक्षाओं के आयोजन से बच्चों के अभिभावक चिंतित हैं। एक बच्चे के पिता ने परीक्षा केंद्र के बाहर कहा, ‘हमारे बच्चों को इस कोरोना महामारी के बीच परीक्षा देनी पड़ रही है, इससे हमारी चिंता दुगुनी हो गई है।’