इसरो के फेसबुक पेज से लिया गया एक चित्र।
इसरो के फेसबुक पेज से लिया गया एक चित्र।

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। देश में अंतरिक्ष तकनीक और शिक्षा से संबंधित नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए इसरो 100 विज्ञान प्रयोगशालाओं को गोद लेगा। विज्ञान शिक्षा की दिशा में यह बड़ा कदम है जिसका लाभ देशभर के अनेक विद्यार्थियों को मिलेगा।

यह फैसला इसरो, अटल इनोवेशन मिशन और नीति आयोग ने एक वर्चुअल बैठक में लिया। नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार ने उक्त फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत सरकार के विभिन्न विभाग और मंत्रालय ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के लिए तालमेल से काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि यह हमारे नवोदित अंतरिक्ष शोधकर्ताओं और अंतरिक्ष यात्रियों के लिए देश के सर्वोत्तम दिमागों से सीखने और अपने स्कूल, परिवार और समुदाय के लिए प्रेरणा बनने का एक बड़ा अवसर है।

वहीं, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने इस फैसले पर खुशी जताते हुए कहा कि इससे विद्यार्थियों को इसरो वैज्ञानिकों और शोाकर्ताओं से मार्गदर्शन मिलेगा।

इसरो अध्यक्ष डॉ. के सिवन ने कहा कि इस पहल से स्कूली बच्चों में परंपरागत ढंग से सीखने की तुलना में नवाचार और अनुभवात्मक रूप से सीखने की भावना को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। यह परियोजना-आधारित शिक्षा, स्कूल के दिनों से ही अनुसंधान के प्रति दृष्टिकोण को बेहतर बनाएगी।

उन्होंने कहा कि 100 एटीएल को अपनाने के साथ इसरो विद्यार्थियों के साथ जुड़ने के लिए, उन्हें ‘आत्मनिर्भर भारत’ के एक हिस्से के रूप में अपने अंतरिक्षीय सपनों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक छोटा-सा कदम उठा रहा है।