कर्नाटक: महामारी के कारण स्कूल छूटने वाले छात्रों का होगा सर्वे

प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोत: PixaBay
प्रतीकात्मक चित्र। फोटो स्रोत: PixaBay

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। छात्रों के बीच बाल श्रम के मामलों में बढ़ोतरी के आंकड़े सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने उन छात्रों के घर सर्वेक्षण करने का फैसला किया है जो स्कूल जाने से चूक गए।

हाल में जारी एक मीडिया रिपोर्ट में यह बताया गया था कि सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में अभी भी 15-20 प्रतिशत छात्र स्कूल वापस नहीं लौटे हैं जिनमें अधिकांश प्रवासी बच्चे हैं।

वहीं शिक्षकों का इस बारे में यह कहना है कि सरकार द्वारा एसएसएलसी परीक्षा में शामिल होने के लिए अनिवार्य 75 प्रतिशत उपस्थिति में छूट देने के कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई है।

कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना काल में कुछ छात्रों ने अपने परिवार की आय का विकल्प बनने के लिए कई तरह की छोटी नौकरियां की जो महामारी के बाद पूर्णकालिक नौकरियों में बदल गई।

शिक्षा मंत्री एस सुरेश कुमार ने गुरुवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि महामारी के कारण कई महीनों तक बाल श्रमिकों और बाल विवाह के मामलों में बढ़ोतरी की रिपोर्टों के मद्देनजर निरीक्षण किया जाए।

कुमार ने कहा कि निरीक्षण एक महीने के भीतर प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा पूरा किया जाना चाहिए।

इस दौरान उन्होंने शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास और श्रम विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और श्रम विभाग और ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज विभाग के निरीक्षकों के साथ मुलाकात भी की।

मंत्री ने यह भी कहा कि बाल श्रम में फंसे छात्रों की शिक्षा की निरंतरता और बाल विवाह का शिकार होने वाले बच्चों के पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों के समन्वय के साथ एक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए।