भारतीय पासपोर्ट
भारतीय पासपोर्ट

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कोरोना महामारी के प्रसार ने जहां लोगों की ज़िंदगी की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिए, वहीं पासपोर्ट की मांग में भी खासी कमी आई है। विदेश में पढ़ाई, नौकरी या घूमने जाने पर सबसे पहले जरूरी होता है पासपोर्ट, जो हर किसी का सपना होता है लेकिन कोरोना महामारी के मद्देनजर पासपोर्ट की मांग में काफी गिरावट आई।

पासपोर्ट और संबंधित सेवाओं के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (आरपीओ), बेंगलूरु को हर साल बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त होते थे लेकिन कोरोना की दस्तक के बाद लोगों ने पासपोर्ट बनवाने में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। इस तरह, पिछले वर्ष की तुलना में दिए गए आवेदनों और दी गईं सेवाओं की संख्या में तेज गिरावट देखी गई।

आरपीओ द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, इस साल अप्रैल से अक्टूबर के मध्य तक पासपोर्ट जारी करने सहित विभिन्न सेवाओं के लिए 76,695 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 76,523 दिए गए। इस दौरान जारी किए गए पासपोर्ट की अंतिम संख्या 88,139 थी। इसके अलावा 3,135 पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट (पीसीसी) और 17 सरेंडर सर्टिफिकेट (एससी) भी जारी किए गए।

पिछले वर्ष इन्हीं साढ़े छह महीनों के दौरान, आरपीओ द्वारा 4,24,804 आवेदन प्राप्त किए गए थे, जिनमें से 4,30,087 दिए गए थे। वहीं, 4,34,700 पासपोर्ट, 12,899 पीसीसी और 55 एससी जारी किए गए। चूंकि कोरोना के कारण अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा बंद थी और देश में कड़ा लॉकडाउन लागू होने से पासपोर्ट की कोई आवश्यकता नहीं थी।

पिछले कुछ वर्षों में, आरपीओ को पासपोर्ट और संबंधित सेवाओं के लिए सात लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इस बार कम मांग होने से साल के आखिर में जारी होने वाले आंकड़ों की संख्या पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, लॉकडाउन में ढील दिए जाने और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आने के बाद पासपोर्ट आवेदनों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई है।