विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार
विधानसभा अध्यक्ष केआर रमेश कुमार

राज्यपाल की 2 डेडलाइन के बावजूद फ्लोर टेस्ट नहीं हुआ

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक विधानसभा में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने शुक्रवार को भी विश्वासमत हासिल नहीं किया। इससे पहले राज्यपाल वजुभाई वाला ने मुख्यमंत्री कुमारस्वामी को बहुमत साबित करने के लिए दोपहर 1.30 बजे और फिर शाम 6 बजे तक की डेडलाइन दी थी।

उधर कुमारस्वामी ने राज्यपाल के खिलाफ फ्लोर टेस्ट के लिए डेडलाइन देने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी लगाई। विधानसभा में गुरुवार की तरह ही शुक्रवार को भी चर्चा हुई। कुमारस्वामी ने कहा, मेरे मन में राज्यपाल के लिए सम्मान है, लेकिन उनके दूसरे प्रेम पत्र ने मुझे आहत किया।’

विपक्ष के नेता बीएस येड्डीयुरप्पा के निजी सचिव संतोष के साथ निर्दलीय विधायक एच नागेश की फोटो दिखाते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, क्या वाकई उन्हें विधायकों की खरीद-फरोख्त के बारे में 10 दिन पहले ही पता चला? मैं फ्लोर टेस्ट का फैसला स्पीकर पर छोड़ता हूं। मैं दिल्ली द्वारा निर्देशित नहीं हो सकता। मैं स्पीकर से अपील करता हूं कि राज्यपाल की ओर से भेजे गए पत्र से मेरी रक्षा करें।

कुमारस्वामी ने कहा, पहले राज्य में जारी राजनीतिक संकट पर चर्चा होगी। बाद में फ्लोर टेस्ट होगा। राज्य में जब से कांग्रेस-जेडीएस सरकार बनी है तभी से इसे गिराने के लिए माहौल बनाया जा रहा है। मुझे पहले दिन से पता था कि सत्ता ज्यादा नहीं चलेगी। देखता हूं भाजपा कितने दिन सरकार चला पाएगी? मुद्दे पर बहस होने दीजिए।

उधर, येड्डीयुरप्पा ने कहा, स्पीकर सर हम आपका आदर करते हैं। राज्यपाल के आखिरी पत्र में कहा गया है कि विश्वास मत आज साबित होना चाहिए। हमारे विधायक देर रात तक शांति से बैठे हैं। इसमें जितना वक्त लगे, हमें देना चाहिए। इससे हम राज्यपाल के आदेश का मान भी रख पाएंगे। कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरामैया ने कहा कि बहस अभी पूरी नहीं हुई है और 20 सदस्यों को इसमें हिस्सा लेना है। मुझे लगता है कि यह सोमवार को भी जारी रहेगी। कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, इसमें शीर्ष अदालत के 17 जुलाई के फैसले को चुनौती दी गई।

दरअसल, कोर्ट ने 17 जुलाई को कहा था कि 15 बागी विधायकों को सदन की कार्यवाही का हिस्सा बनने के लिए बाध्य न किया जाए। कांग्रेस कर्नाटक चीफ दिनेश गुंडूराव ने याचिका दायर कर कोर्ट से फैसले पर स्पष्टीकरण की मांग की है। इसमें कहा गया है कि कोर्ट का आदेश व्हिप जारी करने के पार्टी के अधिकार को प्रभावित करता है।