बेंगलूरू। ऊर्जा मंत्री डी के शिवकुमार ने कहा है कि मॉनसून की विफलता और जल विद्युत उत्पादन करने के लिए प्रदेश के जलाशयों में पानी का कम प्रवाह चिंता का कारण है। हालांकि, उन्होंने आश्वासन दिया कि राज्य में बिजली की निरंतर आपूर्ति को बनाए रखने के लिए सभी एहतियाती उपाय किए जाएंगे। मानसून के दौरान अब तक हाइड्रो इले्ट्रिरक पावर उत्पादन करने वाले जलाशयों में पानी की कमी है लेकिन घरेलू, उद्योग और किसानों के लिए बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठाए जाएंगे। यहां ब्रिटिश उप उच्चायुक्त डॉमनिक मैक एलीस्टार के साथ बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में राज्य में ८३०० मेगावाट बिजली की मांग है और राज्य में पीक ऑवर के दौरान यह मांग ९००० मेगावाट तक हो जाती है। इसकी आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्दरामैया के साथ आने वाले दिनों में उठाये जाने के कदमों के बारे में चर्चा करेंगे। मंत्री ने स्पष्ट किया कि केंद्र द्वारा कम दरों पर बेचे जाने वाले एलईडी बल्बों की आपूर्ति बंद कर दिए जाने के बाद से ही कर्नाटक में इनका वितरण रोका गया है। शिवकुमार ने कहा कि हाल ही में दिल्ली के दौरे के दौरान उन्होंने केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की और बिजली उत्पादन के लिए कोयले की आपूर्ति के लिए अपील की थी क्योंकि राज्य में थर्मल योजनाओं को इसकी तीव्र कमी का सामना करना प़ड रहा है।गोयल ने छत्तीसग़ढ से कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान ब्रिटिश उप उच्चायुक्त ने अक्षय स्रोतों और सौर ऊर्जा के उपयोग के लिए राज्य द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की है। यदि अनुरोध लिखित रूप में किया गया तो उन्होंने ब्रिटिश सरकार से बिजली परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है। ब्रिटिश सरकार स्मार्ट मीटर स्थापित करने के लिए वित्त का विस्तार करने के लिए भी तैयार है। शिवकुमार ने कहा कि स्मार्ट मीटर मैसूर में परीक्षण के आधार पर शुरू किया गया है और राज्य के अन्य सभी स्थानों तक इसको विस्तार दिया जाएगा।