बेंगलूरु। केन्द्र सरकार द्वारा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली को लागू करने में अब एक माह से कम समय बाकी है। राज्य की कांग्रेस नीत सरकार ने बुधवार को कर्नाटक वस्तु एवं सेवा कर विधेयक (बिल), २०१७ विधानसभा में पेश किया। मुख्यमंत्री सिद्दरामैया, जिनके पास वित्त विभाग भी है, ने विधानसभा के समक्ष विधेयक को पेश किया ताकि वस्तु या सेवाओं या दोनों की अंतर-राज्यीय आपूर्ति और उससे संबंधित मामले या उससे प्रासंगिक मामले पर कर लगाने और वसूलने का प्रावधान कर्नाटक राज्य द्वारा किया जाए। देश के सात राज्यों मेघालय, पंजाब, तमिलनाडु, केरल, जम्मू एवं कश्मीर और पश्चिम बंगाल के साथ कर्नाटक भी एक ऐसा राज्य है जहां अभी भी एसजीएसटी कानून पारित किया जाना है। जम्मू एवं कश्मीर, जहां भाजपा की पीडीपी के साथ गठबंधन की सरकार है, अन्य सभी गैर भाजपा शासित प्रदेश हैं। संयोगवश यूपीए-२ शासन के दौरान कांग्रेस ने जीएसटी बिल प्रस्तुत किया था और भाजपानीत एनडीए का तीन वर्ष पूर्व शासन में आने के पहले राज्य में पार्टी ने उसके कार्यान्वयन का पूर्ण समर्थन किया था। ज्ञातव्य है कि जीएसटी प्रणाली के तहत समस्त प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कर एक एकल कर में सम्मिलित हो जाएंगे जिसे वस्तु या सेवाओं या दोनों की आपूर्ति पर निर्माण या आयात से शुरू होकर चेन आपूर्ति के प्रत्येक चरण पर और अंतिम खुदरा स्तर तक लगाया जाएगा। इस प्रकार, कोई कर जो वर्तमान में वस्तु या सेवाओं की आपूर्ति पर राज्य सरकार या केन्द्र सरकार द्वारा लगाया जा रहा है, वह अब १ जुलाई से लागू होने वाले जीएसटी में परिवर्तित हो जाएगा। इस बीच, सिद्दरामैया ने कर्नाटक विक्रय कर अधिनियम १९५७ में संशोधन करने के लिए कर्नाटक विक्रय कर (संशोधन), विधेयक २०१७ भी पेश किया। इस संशोधन के तहत पेट्रोल, डीजल, एवियेशन टर्बाइन फ्यूअल, क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस पर जीएसटी परिषद द्वारा निर्धारित तारीख से कर लगाया जाएगा। तब तक और उसके बाद भी इन उत्पादों पर विक्रय कर लगाने का अधिकार राज्यों के पास होगा। अतएव कर्नाटक विक्रय कर अधिनियम १९५७ में संशोधन करने का विचार किया गया है। ऐसा संशोधन विधेयक में बताया गया है।