बेंगलूरु/भाषा। कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा ने कहा कि राज्य में कोरोना वायरस के मामलों की जांच के लिए किट एवं मास्क की कोई कमी नहीं है और यदि आवश्यकता पड़ती है तो सरकार इनका आयात करेगी। येडियुरप्पा ने एक सर्वदलीय बैठक बुलाई और सरकार द्वारा राज्य में कोरोना वायरस को रोकने के लिए किए गए उपायों के बारे में नेताओं को अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि सरकार ने पुलिस एवं असैन्य कर्मियों को जीवन बीमा मुहैया कराने का फैसला किया है और खाद्यान्न की आपूर्ति बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है। एक सरकारी विज्ञप्ति में उनके हवाले से कहा गया, ‘जांच किट, दवाइयों और मास्क की कोई कमी नहीं है। यदि आवश्यकता पड़ती है तो हम इन्हें और आयात करेंगे… हम सभी जिला एवं तालुक अस्पतालों में जांच किट वितरित करेंगे।’

राज्य में कोविड-19 के अब तक 76 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से तीन लोगों की जान जा चुकी है और पांच को स्वास्थ्य लाभ होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। यहां विधान-सौध में आयोजित बैठक में पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्दरामैया ने कहा कि विदेश से आ रहे यात्रियों की जांच प्रक्रिया में खामियां है। साथ ही उन्होंने आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति बरकरार रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

येडियुरप्पा ने कहा कि खाद्यान्न की आपूर्ति जन वितरण प्रणाली के तहत की जाएगी और सरकार ने हर प्रकार की समस्या से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरती हैं। उन्होंने नेताओं को बताया कि राज्य में कृषि संबंधी गतिविधियों पर कोई रोक नहीं है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने को लेकर मैं 13 मार्च से नियमित रूप से बैठकें कर रहा हूं।’इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री बी श्रीरामुलु, चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. के सुधाकर, आईटी-बीटी मंत्री सीएन अश्वथ नारायण, उपमुख्यमंत्री लक्ष्मण सावदी, सिद्दरामैया, विपक्षी विधायक एचडी रेवन्ना, डीके शिवकुमार और विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष केआर रमेश कुमार ने भाग लिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के आदेशों के क्रियान्वयन की देखरेख के लिए मंत्रियों और अधिकारियों का कार्य बल बनाया गया है। येडियुरप्पा ने दुनियाभर की मौजूदा स्थिति पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोरोना वायरस के कारण हर जगह सामान्य जीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है।

मुख्यमंत्री ने बैठक में राज्यभर में क्लिनिकों की संख्या, डॉक्टरों की उपलब्धता, पृथक् कमरों की संख्या और राज्य में डॉक्टरों के लिए सुरक्षा उपकरणों की उपलब्धता के बारे में भी बताया।