मजदूरों से अतिरिक्त घंटे काम करवाने का आदेश लिया वापस

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बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक उच्च न्यायालय के निर्देश के तहत राज्य सरकार ने 22 मई को जारी किया गया अपना एक आदेश रद्द कर दिया है। इस आदेश के तहत निजी कंपनियों को यह अनुमति दी गई थी कि वह अपने कामगारों से हर दिन 8 घंटे के स्थान पर 10 घंटे काम लें। कोरोना लॉकडाउन के दौरान निजी कंपनियों को हुए घाटे को देखते हुए फैक्ट्रीज एक्ट 1948 के प्रावधानों के तहत निजी कंपनियों को राहत के तौर पर यह अनुमति दी गई थी।

उल्लेखनीय है कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 9 जून के अपने एक आदेश में राज्य सरकार से कहा था कि अगर वह इस मामले में दर्ज याचिका पर होनेवाली अगली सुनवाई तक अपने 220 मई का आदेश वापस नहीं लेती है तो अदालत वह आदेश रद्द कर देगी। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश एएस ओका की अगुवाई वाली खंडपीठ ने 9 जून को यह बात कही थी। खंडपीठ ने राज्य सरकार द्वारा जारी की गई अधिसूचना को फैक्ट्रीज एक्ट की धारा 5 के तहत गलत पाया था।

इस धारा में राज्य सरकारों को यह अधिकार दिया गया है कि सार्वजनिक आपात स्थिति में वह इस कानून के प्रावधानों में जरूरी बदलाव कर सकती हैं। इसके साथ ही खंडपीठ ने पाया कि राज्य सरकार खुद ही यह स्वसीकार कर चुकी है कि लॉकडाउन के कारण जो स्थिति उत्पन्न हुई थी, उसे सार्वजनिक आपात स्थिति नहीं माना जा सकता है। इसके बाद कोर्ट ने राज्य सरकार को यह अधिसूचना वापस लेने का निर्देश देते हुए 12 जून को मामले की अगली सुनवाई करने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही सरकार को यह चेतावनी भी दी गई थी कि अगर वह 12 जून तक अपना आदेश वापस नहीं लेती है तो अगली सुनवाई के दिन कोर्ट वह ओदश खारिज कर देगा।

आज इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश अभय ओका और न्यायाधीश ईएस इंदिरेश को कर्नाटक के अतिरिक्त महाधिवक्ता ध्यान चिन्नप्पा ने बताया कि 11 जून की एक अधिसूचना के द्वारा 22 मई की अधिसूचना को वापस ले लिया गया है। इसके बाद कोर्ट ने आरटीआई कार्यकर्ता एच मराठी द्वारा दाखिल की गई याचिका का निस्तारण कर दिया।