भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए खुशबू सुंदर
भाजपा की सदस्यता ग्रहण करते हुए खुशबू सुंदर

नई दिल्ली/भाषा। दक्षिण भारतीय फिल्मों की अभिनेत्री खुशबू सुंदर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए सोमवार को भाजपा का दामन थाम लिया। इसके बाद उन्होंने कहा कि देश को आगे ले जाने के लिए मोदी जैसे नेता की जरूरत है। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि, तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष एल मुरूगन, भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा और राज्यसभा सदस्य जफर इस्लाम की मौजूदगी में उन्होंने यहां भाजपा मुख्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

भाजपा नेताओं ने विश्वास जताया कि उनके आने से तमिलनाडु में पार्टी का विस्तार होगा। अगले साल राज्य विधानसभा के चुनाव होने हैं। संवाददाताओं से बातचीत में सुंदर ने कहा, ‘यदि राष्ट्र को आगे बढ़ना है तो हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसे नेता की जरूरत है जो देश को सही दिशा में और उसके वैभव की ओर ले जाए।’

बाद में उन्होंने पार्टी मुख्यालय में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की। खुशबू 2014 में कांग्रेस में शामिल होने से पहले द्रमुक में थीं। पात्रा ने भाजपा में उनका स्वागत करते हुए कहा कि खुशबू सुंदर ने 200 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया है। द्रमुक में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के बाद वह कांग्रेस में भी रहीं। उनकी प्रसिद्धि का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि राज्य में उनके नाम का एक मंदिर तक बनाया गया है।

खुशबू के भाजपा में शामिल होने की संभावना को देखते हुए कांग्रेस ने सोमवार को ही उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के पद से हटा दिया था। इस बीच, खुशबू सुंदर ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा सौंप दिया और कहा कि वह ऐसा कुछ नेताओं के ‘अपनी बात थोपने’ और ‘दबाव डालने’ के विरोध में कर रही हैं।

उन्होंने अपने इस्तीफे में दावा किया, ‘पार्टी के अंदर शीर्ष स्तर पर कुछ लोग हैं जिनका जमीनी स्तर पर कोई संपर्क या सार्वजनिक पहचान नहीं है, वो अपनी बात थोप रहे हैं और मेरे जैसे लोग जो पार्टी के लिए गंभीरता से काम करना चाहते हैं, उन्हें पीछे किया जा रहा है और दबाया जा रहा है।’

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मीडिया प्रभारी प्रणव झा ने एक बयान में कहा, ‘खुशबू सुंदर को कांग्रेस प्रवक्ता के पद से ‘तत्काल प्रभाव’ से हटाया जाता है।’ हाल के दिनों में खुशबू सुंदर कुछ मुद्दों पर कांग्रेस के आधिकारिक रुख से अलग राय जाहिर कर रही थीं। कुछ महीने पहले उन्होंने पार्टी के रुख से इतर नई शिक्षा नीति का समर्थन किया था।

उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु की राजनीति में क्षेत्रीय दलों का वर्चस्व रहा है। द्रमुक और अन्नाद्रमुक के इर्दगिर्द ही प्रदेश की राजनीति का पहिया घूमता रहा है। दोनों ही दल बारी-बारी से प्रदेश के साथ-साथ केंद्र की राजनीति में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। फिलहाल, अन्नाद्रमुक का राज्य की सत्ता पर कब्जा है।