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मद्रास उच्च न्यायालय: सेवानिवृत्ति आयु को चुनौती देने वाली याचिका खारिज, 5,000 का जुर्माना
न्यायालय ने जनहित याचिका दायर करने वाले पर दो साल के लिए पाबंदी भी लगाई
 
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि बेरोजगारी बढ़ रही है और सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाना उन लोगों के लिए नुकसानदेह होगा जो सरकारी नौकरी की तलाश में हैं।

चेन्नई/दक्षिण भारत। मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक याचिकाकर्ता पर 5,000 रुपए का जुर्माना लगाया, जिसने राज्य सरकार के फरवरी 2021 के सरकारी अधिकारियों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु को 59 साल से बढ़ाकर 60 साल करने के फैसले को चुनौती दी थी।

इसके अलावा, मुख्य न्यायाधीश संजीब बनर्जी और न्यायमूर्ति पीडी ऑडिकेसवालु की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता को संबंधित न्यायालय की अनुमति प्राप्त किए बिना दो साल के लिए मद्रास उच्च न्यायालय में कोई भी जनहित याचिका (पीआईएल) याचिका दायर करने पर रोक लगा दी।

क्या था याचिका में?
याचिकाकर्ता ने दलील दी थी कि बेरोजगारी बढ़ रही है और सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाना उन लोगों के लिए नुकसानदेह होगा जो सरकारी नौकरी की तलाश में हैं। न्यायालय ने याचिका पर विचार करने से इन्कार कर दिया और इसे गलत, बेतुकी, केवल प्रचार पाने के उद्देश्य के लिए दायर और उचित विवरण व सामग्री से रहित करार दिया। 

पहले भी आ चुका ऐसा मामला
उल्लेखनीय है कि उच्च न्यायालय की एक अन्य पीठ ने इस साल जुलाई में इसी तरह की चुनौती को खारिज करते हुए कहा था कि यह सरकार की नीति का मामला है।

न्यायालय ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी थी कि याचिकाकर्ता इस संबंध में अदालत की अनुम​ति प्राप्त किए बिना दो साल की अवधि के लिए यहां में कोई जनहित याचिका लाने का हकदार नहीं होगा।