बेंगलूरु/दक्षिण भारत। अगर लोगों ने कोरोना की रोकथाम के लिए आवश्यक साव​धानियों – सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनिटाइजेशन – का पालन नहीं किया तो नवंबर के पहले पखवाड़े में संक्रमण के मामलों में उछाल आ सकता है। चूंकि यह त्योहारी सीजन है, ऐसे में विशेषज्ञों ने इस संबंध में चेतावनी दी है।

राज्य की कोविड-19 विशेषज्ञ समिति के सदस्य केरल का उदाहरण देते हैं, जहां ओणम के बाद कोरोना के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई, क्योंकि त्योहार के मौके पर लोग शहरों से अपने गांवों की ओर जाते हैं तथा एक-दूसरे से मुलाकात करते हैं। लिहाजा संक्रमण रोकने के लिए पर्याप्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

राज्य की कोविड-19 टास्क फोर्स में लैब्स और टेस्टिंग के नोडल अधिकारी सीएन मंजूनाथ कहते हैं कि लोगों को त्योहारों पर शहर से गांवों में जाने से बचना चाहिए, जैसा कि वे आमतौर पर करते हैं। उन्हें यह महसूस करना चाहिए कि वे या तो संक्रमण को वहां ले जा सकते हैं या इसे वापस अपने साथ ला सकते हैं।

उनके मुताबिक, राज्य में विभिन्न महत्वपूर्ण दिवस, त्योहार आने वाले हैं। इसमें यह हफ्ता और आने वाला हफ्ता बहुत महत्वपूर्ण होने जा रहे हैं। अभी दशहरा, ईद मिलाद, वाल्मीकि जयंती और कन्नड़ राज्योत्सव आएंगे। अगर इस दौरान लोग लापरवाही बरतते हैं तो कोरोना के मामलों में उछाल से इन्कार नहीं किया जा सकता।

इसी प्रकार, एक और विशेषज्ञ भी त्योहारी सीजन में पर्याप्त सावधानी बरतने की बात को रेखांकित करते हैं। वे कहते हैं, लोगों को यह समझना चाहिए कि वायरस अभी गया नहीं है और जिम्मेदारी पूर्वक व्यवहार करने से ही इसके प्रसार को रोका जा सकता है।