मद्रास उच्च न्यायालय
मद्रास उच्च न्यायालय

चेन्नई/दक्षिण भारत। मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को मरीना बीच पर सामान विक्रेताओं को 900 आधुनिक पुशकार्ट (रेहड़ी) प्रदान करने के लिए निविदा के संशोधन का आदेश दिया। न्यायालय ने निविदा को दो अलग भागों में विभाजित किया। साथ ही, पुशकार्ट की समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए इसे दो अलग-अलग आपूर्तिकर्ताओं को आवंटित किया।

न्यायालय ने निगम को यह भी निर्देशित किया कि यदि वे समय पर पुशकार्ट की आपूर्ति करने में विफल रहते हैं तो भारी जुर्माना लगाया जाएगा। जस्टिस विनीत कोठारी और जस्टिस एमएस रमेश की दो सदस्यीय पीठ ने चेन्नई कॉरपोरेशन के आयुक्त जी प्रकाश के वीडियो कॉन्फ्रेंस से पेश होने के बाद यह निर्देश दिया।

मामले पर टिप्पणी करते हुए जस्टिस विनीत कोठारी ने कहा, ‘हमें परियोजना के त्वरित वितरण और त्वरित कार्यान्वयन की आवश्यकता है ताकि वर्क ऑर्डर दो आपूर्तिकर्ताओं के बीच विभाजित हो जाएं। 900 आधुनिक पुशकार्ट की आपूर्ति दोनों कंपनियों द्वारा की जाएगी जो निगम द्वारा की गई बोलियों के लिए योग्य हैं।’

निर्देश के अनुसार, कंपनियों को पहले महीने के लिए 300 पुशकार्ट की आपूर्ति करनी होगी। फिर इनकी गुणवत्ता और डिजाइन की समीक्षा की जाएगी। पीठ ने कहा, ‘यह बड़े जनहित के लिए है और परियोजना के जल्द पूरा होने को सुनिश्चित करने के लिए भी है।’

न्यायालय ने साफ-सुथरे समुद्र तट और सभी पुशकार्ट व्यवस्थित होने पर जोर देते हुए कहा कि यदि संबंधित कंपनियां निर्धारित समय पर आपूर्ति करने में विफल रहीं तो हम जुर्माना लगाने जा रहे हैं।

इसके अलावा, पीठ ने यह भी कहा कि यदि कंपनी पुशकार्ट की आपूर्ति में दो दिन की देरी करती है, तो 10 प्रतिशत की कटौती की जाएगी। यदि देरी एक सप्ताह से अधिक हुई तो 25 प्रतिशत कटौती, और यदि 15 दिनों से ज्यादा देरी हुई तो 50 प्रतिशत तक कटौती की जाएगी।

इस संबंध में हुई प्रगति की न्यायालय द्वारा मॉनिटरिंग की जाएगी। न्यायालय ने निगम को 11 जनवरी को अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। जी प्रकाश ने कहा कि कुछ माह पहले न्यायालय को विस्तृत जानकारी दी गई थी और परियोजना को उसी के अनुसार लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अद्यतन कार्य आदेश सोमवार तक जारी किए जाएंगे।