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स्टालिन ने मेकेदातू बांध मुद्दे पर कर्नाटक से बातचीत के विकल्प को खारिज किया
 
स्टालिन ने मेकेदातू बांध मुद्दे पर कर्नाटक से बातचीत के विकल्प को खारिज किया
फोटो स्रोत: सीएम स्टा​लिन ट्विटर अकाउंट।

नई दिल्ली/चेन्नई/भाषा। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने मेकेदातू बांध के मुद्दे पर कर्नाटक से बातचीत के विकल्प को सोमवार को खारिज कर दिया। स्टालिन ने राष्ट्रीय राजधानी में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात करने के बाद संवाददाताओं से कहा कि केंद्र द्वारा दिए गए आश्वासन के आधार पर उनकी सरकार को विश्वास है कि कर्नाटक इस पहल पर आगे नहीं बढ़ सकता और बांध के मसले पर कानूनी विकल्प भी अपनाए जाएंगे।

स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने 1921 में स्थापित विधानसभा की शताब्दी मनाने का निर्णय लिया है। तमिलनाडु विधानसभा को उस समय ‘मद्रास विधान परिषद’ के नाम से जाना जाता था जिसे तत्कालीन मद्रास प्रेसिडेंसी द्वारा निर्वाचित किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति से शताब्दी समारोह की अध्यक्षता करने का अनुरोध किया जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया। स्टालिन ने कहा कि समारोह के दौरान विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री एम करुणानिधि की तस्वीर का अनावरण भी किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति कोविंद, मदुरै में एक पुस्तकालय, चेन्नई में एक सरकारी अस्पताल और स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ की स्मृति में एक स्तंभ का शिलान्यास करने के लिए भी सहमत हो गए हैं।

मेकेदातू बांध के मुद्दे पर कर्नाटक द्वारा केंद्र पर दबाव बनाने के बाबत पूछे जाने पर स्टालिन ने कहा कि उन्होंने हाल में प्रधानमंत्री से मुलाकात के दौरान पड़ोसी राज्य द्वारा कावेरी नदी पर जलाशय बनाने के विरुद्ध कदम उठाने के लिए बात की थी।

स्टालिन ने कहा कि उनकी सरकार को विश्वास है कि प्रधानमंत्री और जल शक्ति मंत्री द्वारा आश्वासन दिए जाने के बाद कर्नाटक के मुख्यमंत्री येडियुरप्पा की पहल आगे नहीं बढ़ेगी।

उन्होंने कहा, ‘मामला उच्चतम न्यायालय में भी लंबित है। हम कानूनी रूप से इसका सामना करेंगे।’ यह पूछे जाने पर कि क्या मेकेदातू मुद्दे पर तमिलनाडु सरकार कर्नाटक से बात करेगी, स्टालिन ने कहा, ‘बातचीत का अब कोई विकल्प नहीं है, यह हमारे (जल संसाधन) मंत्री (दुरईमुरुगन) द्वारा स्पष्ट कर दिया गया है।’