चेन्नई। राज्य के स्कूली शिक्षा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री सेंगोट्टैयां ने बुधवार को विधानसभा में कहा कि राज्य सरकार राज्य में स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने की दिशा में कई कार्य किया है। उन्होंने कहा कि स्कूली शिक्षा विभाग राज्य में पहली बार ग्रेड के आधार पर परिणामों की घोषणा करने की शुरुआत की है और बच्चों पर दबाव कम करने के लिए भी स्कूलों को निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए बारहवीं की तरह ग्यारहवीं में भी परीक्षा लेने की शुरुआत करने की धोषणा की है। राज्य स्कूली शिक्षा विभाग ने विद्यार्थियों पर परीक्षा का दबाव कम करने के लिए बारहवीं की परीक्षा के कुल अंकों को १२०० से घटा कर ६०० करने का निर्णय लिया गया है। स्कूली शिक्षा विभाग ने राज्य दसवीं बोर्ड और राज्य बारहवीं बोर्ड के पाठ्यक्रमों को बदलने की योजना बना रहा है। इससे विद्यार्थियों पर जहां दबाव कम होगा वहीं उन्हें उच्च शिक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकेगा। विभाग के अधिकारियों के अनुसार चूंकि कुल अंकों में कटौती की जाएगी इसलिए अब परीक्षा की अवधि भी घटाई जाएगी। आगामी अकादमिक सत्रों के दौरान बारहवीं और दसवीं बोर्ड की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों को उत्तरपुस्तिकाओं में उत्तर लिखने के लिए तीन घंटे के बदले ढाई घंटे का समय देने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के विशेषज्ञों से विचार विमर्श करने के बाद इन नए बदलावों को लागू करने की घोषणा की गई है।सेंगोट्टैयां ने द्रवि़ड मुनेत्र कषगम (द्रमुक) विधायक केएल नेहरु की ओर से शून्य काल के दौरान प्रश्न काल के दौरान राज्य मैट्रिकुलेशन बोर्ड और राज्य बारहवीं बोर्ड में शिक्षा की गुणवत्ता केन्द्रीय माध्यिक शिक्षा बोर्ड के स्तर का बनाने की दिशा में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे प्रश्न पूछने के बाद कहा कि राज्य सरकार दसवीं और बारहवीं बोर्ड की परीक्षा में राष्ट्रीय योग्यता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) की तरह ही वस्तुनिष्ठ प्रश्न किया जाएगा। इसलिए किया जा रहा है कि विद्यार्थी केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षा प्रणाली को समझ सकें। उन्होंने कहा कि सरकार आने वाले समय में स्कूली शिक्षा और विशेषकर परीक्षा प्रणाली में कुछ और परिवर्तन करने की योजना बना रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार राज्य के १७ जिलों में स्कूल भवनों का निर्माण किया गया है। २२ स्कूलों में छात्रों और छात्राओं के लिए छात्रावासों का निर्माण किया गया है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों की ढांचागत सुविधाओं को उन्नत बनाने के लिए लगातार प्रयासरत है। राज्य सरकार ने विभिन्न हाई स्कूलों और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में प्रयोगशाला और कंप्यूटर कक्ष का निर्माण करवा रही है। राज्य के विभिन्न स्कूलों में कंप्यूटर उपलब्ध करवाने के लिए मौजूदा शैक्षणिक सत्र से पूर्व ८० करो़ड रुपए खर्च कि गए हैं। बच्चों को पढाई के साथ ही खेल कूद में आगे बढाने के लिए स्कूलों को खेल का मैदान दिलाने की दिशा में भी प्रयास किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में पढने वाले बच्चों को स्मार्ट कार्ड दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस स्मार्ट कार्ड के जारी होने के बाद विद्यार्थियों को अन्य किसी प्रकार के पहचान पत्र की आवश्यकता नहीं होगी। मंत्री ने कहा कि इस स्मार्ट कार्ड मंे विद्यार्थियों की तस्वीर के साथ उनका ब्लड ग्रुप, पता, आधार का विवरण और उनके परिवार का विवरण मौजूद होगा। उन्होंने कहा कि इन स्मार्ट कार्डों के माध्यम से जहां बच्चों की पहचान सुनिश्चित हो सकेगी वहीं यह स्कूली शिक्षा का डिजिटलीकरण करने की दिशा में उठाया गया एक अच्छा कदम होगा। इस कार्ड में बच्चें के स्कूल,उसके स्कूल में शिक्षकों की संख्या, उसके स्कूल में मौजूद सुविधाएं आदि के बारे में भी जानकारी होगी। इसके साथ ही इन स्मार्ट कार्ड के माध्यम से बच्चों के अकादमिक प्रदर्शन और उसके द्वारा विभिन्न कक्षा में प्राप्त किए गए ग्रेड के बारे में भी जानकारी होगी। स्कूली शिक्षा विभाग ने राज्य दसवीं बोर्ड और राज्य बारहवीं बोर्ड के पाठ्यक्त्रमों को बदलने की योजना बना रहा है। इससे विद्यार्थियों पर जहां दबाव कम होगा वहीं उन्हें उच्च शिक्षा के लिए बेहतर ढंग से तैयार किया जा सकेगा।