न्यायालय ने सीबीआई के नेतृत्व वाली एमडीएम एजेन्सी से प्रगति रिपोर्ट मांगी

उच्चतम न्यायालय
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नई दिल्ली/भाषा। उच्चतम न्यायालय ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की व्यापक साजिश का पर्दाफाश करने के लिये सीबीआई के नेतृत्व में गठित बहु निगरानी एजेन्सी (एमडीएमए) को मंगलवार को अपनी जांच की ताजा प्रगति रिपोर्ट चार सप्ताह के भीतर पेश करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति एल नागेश्‍वर राव और न्यायमूर्ति हेमंत गुप्ता की पीठ ने एमडीएमए की ओर से पेश अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पिंकी आनंद से कहा कि प्रगति रिपोर्ट में श्रीलंका, थाईलैंड और दूसरे देशों को भेजे गये अनुरोध पत्रों की स्थिति को भी शामिल किया जाये।
पीठ ने कहा कि चार सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश की जाये। इसके साथ ही पीठ ने इस मामले को चार सप्ताह बाद सूचीबद्ध कर दिया। शीर्ष अदालत ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि एमडीएमए की रिपोर्ट करीब एक साल पुरानी है और उस समय इस मामले के संबंध में कई देशों को भेजे गये अनुरोध पत्रों के जवाब की प्रतीक्षा थी।
राजीव गांधी हत्याकांड में साजिश के पहलू की जांच के लिये गठित न्यायमूर्ति एम सी जैन आयोग की सिफारिश पर 1998 में एमडीएमए का गठन किया गया था। केन्द्रीय जांच ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी की अध्यक्षता वाली इस जांच एजेन्सी में गुप्तचर ब्यूरो, रॉ और राजस्व गुप्तचर विभाग तथा कई अन्य एजेन्सियों के अधिकारी शामिल हैं। शीर्ष अदालत इस हत्याकांड में दोषी 46 वर्षीय ए जी पेरारिवलन की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें एमडीएमए की जांच पूरी होने तक उसकी उम्र कैद की सजा निलंबित करने का अनुरोध किया गया है। पेरारिवलन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने सुनवाई शुरू होते ही कहा कि उसकी भूमिका सिर्फ नौ वोल्ट की बैट्रियां प्राप्त करने तक ही सीमित थी जिनका राजीव गांधी की हत्या में प्रयुक्त देसी विस्फोटक बनाने में कथित रूप से इस्तेमाल किया गया था। पिंकी आनंद ने शंकरनारायणन की दलील का विरोध किया और कहा कि उसकी भूमिका सिर्फ बैट्रियां प्राप्त करने तक ही सीमित नहीं थी।