एक क्लासरूम में उपस्थित बच्चे
एक क्लासरूम में उपस्थित बच्चे

नौ महीने बाद 10वीं और 12वीं बोर्ड कक्षा के विद्यार्थियों ने दर्ज कराई मामूली उपस्थिति

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। नौ महीने के अंतराल के बाद एक जनवरी को राज्यभर में स्कूल खुले और राज्य बोर्ड, सीबीएसई एवं आईसीएसई बोर्ड के 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों ने कक्षाओं में उपस्थिति दर्ज कराई।

हालांकि इस दौरान स्कूल प्रशासन सावधानी बरतते दिखे और तापमान की जांच, मास्क एवं हैंड सैनिटाइज करने के बाद ही विद्यार्थियों को परिसर में प्रवेश करने दिया गया। कई अभिभावक भी बच्चों के साथ आते देखे गए, चूंकि अधिकांश स्कूलों ने परिवहन व्यवस्था शुरू नहीं की थी।

हालांकि, नए साल का पहला दिन होने के कारण कई बच्चे स्वेच्छा से स्कूल नहीं आए। ऐसे में 50 प्रतिशत विद्यार्थियों के ही कक्षाओं में लौटने की उम्मीद थी।

इस संबंध में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा मंत्री सुरेश कुमार ने शिक्षण संस्थानों की तैयारियों का जायजा लेने के लिए उनका दौरा किया और अभिभावकों की आशंकाओं का निवारण भी किया।

उन्होंने कहा कि वायरस का डर एक या दो दिन में दूर नहीं होगा। माता-पिता जो अभी भी अपने बच्चों को स्कूलों में भेजने से डरते हैं, वे इसका समाधान हो जाने के बाद ऐसा कर सकते हैं। जो बच्चों के साथ अभिभावकों को भेज रहे हैं, उन्हें आश्वस्त किया जा सकता है कि स्कूलों में सावधानी बरती जा रही है।

मंत्री ने बताया कि कोरोना वायरस के नए स्ट्रेन और वर्तमान निवारक उपायों को लेकर विशेषज्ञ समिति से संपर्क किया गया था। विभाग जिलों में सतर्कता दल गठित करने पर विचार कर रहा है जो स्कूलों और उनकी तैयारियों की जांच करेगा।