कर्नाटक में विभिन्न समुदायों की आरक्षण संबंधी मांग पर क्या बोले येडियुरप्पा?

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा। फोटो स्रोतः ट्विटर अकाउंट।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा। फोटो स्रोतः ट्विटर अकाउंट।

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। मुख्यमंत्री बीएस येडियुरप्पा ने शुक्रवार को कहा कि राज्य में मौजूदा आरक्षण में संशोधन करने की विभिन्न समुदायों की मांगों के मद्देनजर राज्य सरकार इस मामले में आगे बढ़ने के तौर-तरीकों पर चर्चा कर रही है।

मुख्यमंत्री ने पत्रकारों को एक सवाल के जवाब में बताया, ‘मैंने बृहस्पतिवार को इस मामले पर मंत्रिमंडल की बैठक में चर्चा की है, सभी मंत्रियों ने अपने विचार व्यक्त किए, आगे बढ़ने को लेकर चर्चा जारी है … कैसे और क्या करना है।’

राज्य सरकार विभिन्न समुदायों की ओर से मौजूदा कोटा में बदलाव की मांग का सामना कर रही है। इसमें वोक्कालिगा और वीराशैव-लिंगायत समुदाय की मांग विशेष रूप से शामिल है।

बेहतर आरक्षण की मांग के बीच, येडियुरप्पा ने हाल में कहा था कि उनकी सरकार कानून और संविधान के दायरे में जो भी संभव होगा, वह करेगी।

वीरशैव-लिंगायत, जिससे येडियुरप्पा आते हैं, केंद्रीय सूची के तहत ओबीसी दर्जे की मांग कर रहे हैं, जबकि इसका उप-समुदाय पंचमाली लिंगायत राज्य कोटा में श्रेणी 2ए के तहत रखा जाना चाहता है।

दूसरी ओर, कुरुबा समुदाय एसटी दर्जे की मांग कर रहा है, वाल्मीकि समुदाय चाहता है कि एसटी कोटा 3 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.5 प्रतिशत किया जाए।

वर्तमान में कर्नाटक में अनुसूचित जातियों के लिए 15 प्रतिशत, एसटी के लिए 3 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जा रहा है।

मंत्रिमंडल की बैठक के बाद बृहस्पतिवार को गृह और विधि मामलों के मंत्री बसवराज बोम्मई ने कहा था कि मुख्यमंत्री ने विभिन्न मंत्रियों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का संज्ञान लिया है और सरकार विधि विशेषज्ञों से राय लेने के साथ ही इस संबंध में अदालती आदेशों की समीक्षा कर रही है।