पाकिस्तान को मिले माकूल जवाब

1010

एक खबर यह है कि दो भारतीय जवानों को शहीद कर उनके शव को क्षत-विक्षत करने का प्रतिशोध भारतीय जवानों ने ले लिया है। परन्तु कहीं भी इस समाचार की पुष्टि न तो सरकार ने और न ही हमारी सेना ने की है इसलिए यही कहना होगा कि पाक की नापाक हरकत का माकूल जवाब देना अभी बाकी है। भारतीय जवानों के शवों के साथ बर्बरता के बाद पूरे देश में आक्रोश की लहर है तथा सरकार पर कुछ न कुछ करने का दबाव है। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि इसकी जो प्रतिक्रिया करनी प़डेगी वे करेंगे। हमारे दो सैनिकों का जो बलिदान है, वह व्यर्थ नहीं जाएगा। उसके बाद सेना और सीमा सुरक्षा बल को कार्रवाई के लिए स्वतंत्र होने का संदेश दिया गया होगा, किंतु अगर इतना हुआ भी तो इसे पर्याप्त नहीं माना जा सकता है। वास्तव में जिस तरह से पाकिस्तान हर थो़डे अंतराल पर ऐसी हरकतें कर रहा है उसके बारे में गंभीरता से विचार करने तथा उसका माकूल जवाब दिए जाने की आवश्यकता है।जिस तरह की घटना को पाकिस्तान ने अंजाम दिया वैसा युद्ध काल में भी नहीं होता और यहां तो युद्ध विराम का काल है। पाकिस्तान की एफडीएल पोस्ट पिंपल से ६४७ मुजाहिद बटालियन ने नियंत्रण रेखा से सटी सीमा सुरक्षा बल या बीएसएफ की अग्रिम पोस्ट पर गोलीबारी कर त़डके संघर्षविराम का उल्लंघन किया था। बीएसएफ पोस्टों पर राकेट भी दागे गए। उस समय भारतीय सेना व सीमा सुरक्षा बल के जवान खुफिया जानकारी के आधार पर वहां बारूदी सुरंग खोज रहे थे। अचानक हुए हमले में बीएसएफ की २०० बटालियन के हेड कांस्टेबल प्रेम सागर व सेना की २२ सिख यूनिट के नायब सूबेदार परमजीत शहीद हो गए तथा बीएसएफ का कांस्टेबल राजेंद्र कुमार घायल हो गया। इसी दौरान पाकिस्तान की बार्डर एक्शन टीम (बैट) भारतीय सीमा में लगभग एक किलोमीटर तक दाखिल हो गई एवं दोनों भारतीय जवानों के शवों को क्षत-विक्षत करने के बाद उनके अंग भी काटकर अपने साथ ले गई। बैट टीम ने सबसे अधिक बर्बरता नायब सूबेदार परमजीत सिंह के पार्थिव शरीर के साथ किया। पाकिस्तान की बैट सेना और आतंकवादी दोनों का सम्मिलित टीम माना जाता है। ध्यान रखिए बैट की टीम ने हमारी सीमा में घुसकर ऐसा किया। यह सामान्य बात नहीं है। किंतु ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। वर्ष १९९९ में करगिल युद्ध के दौरान कैप्टन सौरभ कालिया से लेकर वर्तमान घटना तक पाकिस्तान की बर्बरता और पाशविकता का लंबा इतिहास है। २२ नवंबर २०१६ को माछिल सेक्टर में नियंत्रण रेखा के पास पाकिस्तान के साथ मुठभे़ड में ३ जवान शहीद हुए थे। इनमें राइफलमैन प्रभु सिंह का सिर पाक सैनिकों ने काटा और उनके शरीर को क्षत-विक्षत कर दिया। यह हरकत भी बॉर्डर ऐक्शन टीम की ही थी। पाकिस्तान से आए आतंकवादियों ने २८ अक्टूबर २०१६ को भारतीय सेना के शहीद जवान मंदीप सिंह के शव को क्षत-विक्षत कर दिया। नियंत्रण रेखा के पास कुपवा़डा के माछिल सेक्टर में आतंकियों से मुठभे़ड के दौरान मंदीप सिंह शहीद हो गए थे। मुठभे़ड के दौरान पाकिस्तानी सेना गोलीबारी करके आतंकवादियों को कवर देती रही, और इस दौरान एक आतंकवादी ने शव को क्षत-विक्षत कर दिया। इस बर्बरता के पीछे भी बॉर्डर ऐक्शन टीम का हाथ माना गया। बैट दस्ते ने ही ८ जनवरी २०१३ को हमारे जवान हेमराज सिंह व सुधाकर सिंह की हत्या की थी। हेमराज का सिर काट ले गए थे और सुधाकर का शव अंग भंग किया गया था। पिछले साल जनवरी में यूट्यूब पर एक वीडियो भी अपलोड किया गया था, जिसमें कुछ आतंकवादी शहीद हेमराज के कटे सिर के साथ जश्न मनाते हुए दिख रहे थे। इसके बाद जुलाई में सेना ने जम्मू-कश्मीर में हुई एक मुठभे़ड में जवान हेमराज का सिर कलम करने वाले आतंकवादियों में शामिल मोहम्मद अनवर को मार गिराया था। ३० जुलाई २०११ को पाकिस्तान की ओर से कुपवा़डा के गुगालदार चोटी पर किए गए हमले में राजपूत और कुमाऊं रेजिमेंट के ६ जवान शहीद हुए थे। पाक सौनिक २० कुमाऊं के हवलदार जयपाल सिंह अधिकारी और लांस नायक देवेंदर सिंह का सिर अपने साथ ले गया था। इसका बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने ऑपरेशन जिंजर को अंजाम दिया। इस हमले में कुल ८ पाकिस्तानी सैनिक मारे गए थे। जून २००८ में २/८ गोरखा राइफल का एक जवान अपना रास्ता भूल गया था। इस जवान को पाकिस्तानी बॉर्डर ऐक्शन टीम ने केल सेक्टर में पक़ड लिया था। कुछ दिन बाद शहीद जवान का शरीर बिना सिर के मिला था। इसके बाद एक जवाबी हमले में पाकिस्तान के कुल ८ जवान मारे गए। करगिल में घुसपैठ के दौरान ५ मई १९९९ को कैप्टन सौरभ कालिया और उनके ५ साथियों को पाकिस्तानी फौजियों ने बंदी बना लिया था।जब २० दिन बाद इन जवानों के शव सीमा पार से वापस आए तब पाकिस्तानी फौजियों की बर्बरता की कहानी सामने आई। इन जवानों के साथ क्रूरता की सारी हदें पार की गई थीं। उनके कानों में लोहे की सुलगती छ़डें तक घुसे़डी गई थीं तो पाकिस्तान ऐसी घृणित हरकत करता रहता है। हालांकि हमने यह भी देखा कि हमारी सेना ने ज्यादा घटनाओं का बदला भी लिया है किंतु इससे आगे क्या? क्या भारत की भूमिका जवाबी कार्रवाई तक सीमित रहेगी? क्रूरता और बर्बरता का यह दुस्साहसी सिलसिला अंतहीन चलता रहेगा? पाकिस्तान जो हरकतें करता है ऐसी हरकतों को सेना की दुनिया में गंदी नजर से देखा जाता है। मजे की बात यह कि हर बार वह इससे इन्कार भी करता है। इस बार भी उसने इन्कार किया है। भारत के आरोप को उसने झूठा करार दिया है। पाकिस्तान हर अपने कुकर्म को नकारने वाला देश है। जब भी उसकी ओर से आतंकवादी हरकत होती है, उसकी सेना युद्ध विराम का उल्लंघन करती है, या उसका आतंकवादी पक़डा जाता है, वह सीधे नकारता है। यह बात अलग है कि बाद में सब सच साबित होता है। इसलिए उसके नकारने से हमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। सवाल है कि ऐसा क्या किया जाए जिससे पाकिस्तान भविष्य में ऐसी हरकत करने का दुस्साहस न करे? ऐसा माना जाता है कि इस समय भारत का दबाव कई कारणों से पाकिस्तान पर ब़ढ़ा है और इसलिए वह ज्यादा आक्रामकता दिखा रहा है। यह भी संभव है कि वहां की नागरिक सरकार का सेना पर किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं रह गया हो। हाल के दिनों में जिस तरह उसने युद्ध विराम का उल्लंघन किया है उसका अर्थ क्या हो सकता है? क्या वह एक पूर्ण युद्ध भारत से चाहता है?यह भी ध्यान रखने की बात है कि घटना के एक दिन पहले ही पाक सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने सीमा क्षेत्र का दौरा किया था। उन्होंने कश्मीरियों के संघर्ष से समर्थन तो जताया ही था यह भी कहा था कि भारत लगातार युद्ध विराम का उल्लंघन कर रहा है तथा आपको उसे मुंहतो़ड जवाब देना है। उसके बाद यह कार्रर्वाई हो गई। वैसे तो हमारे पास कार्रवाई के कई विकल्प हैं। नियंत्रण रेखा पर पाकिस्तान जहां कमजोर है वहां उसे ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाया जाए। तोपों से गोलाबारी लगातार की जाए। आप देखेंगे कि इसका असर होगा। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में निश्चित लक्ष्य पर सीमित हवाई कार्रवाई का विकल्प भी हमारे सामने है। फिर से सर्जिकल स्ट्राइक की जाए और उसका सबूत भी सामने रख दिया जाए। इस तरह कई विकल्प हमारे पास हैं। कुल मिलाकर कहने का तात्पर्य यह कि निश्चित रुप से अब वह समय आ गया है जब भारत पाकिस्तान की सेना को उस भाषा में जवाब दे जो भाषा वह समझता है।