कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न सावधानियों पर गौर करना बहुत जरूरी है।
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न सावधानियों पर गौर करना बहुत जरूरी है।

श्रीकांत पाराशर

वर्ष 2020 तो लगभग पूरा ही कोरोना के साये में बीता है। गत मार्च महिने में ही कोरोना के घने डरावने बादल विश्व के अन्य देशों के साथ साथ हमारे देश पर भी मंडराने लगे थे। अभी तक बादल पूरी तरह छंटे भी नहीं हैं। हर कोई इस इंतजार में है कि कोरोना से बचाव वाली वैक्सीन जल्द से जल्द आम आदमी तक पहुंचे और व्यक्ति पहले की तरह सामान्य जीवन जीने की स्थिति में आए। यह इंतजार भी कई महिनों से चल रहा है परंतु अभी तक पूरी तरह सुरक्षित कोई भी अधिकृत वैक्सीन आई नहीं है।

इधर ब्रिटेन से जो खबर आ रही है वह नए सिरे से चिंता पैदा करने वाली है। बताया जा रहा है कि इंग्लैंड में कोरोना के नए अवतार स्ट्रैन वायरस ने दस्तक दी है जो कि कोरोना से भी ज्यादा घातक है। यह समाचार ही दहशत पैदा करने वाला है क्योंकि कोरोना की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष मार से टूट चुका इंसान पहले ही अधमरा हो चुका है और भविष्य के सुनहरे सपनों के सहारे अपने काले डरावने अतीत को भुला देना चाहता है। न जाने कितने परिवारों ने अपने सदस्य खोये हैं। इस कोरोना ने लाखों लोगों को समय से पहले लील लिया है। हजारों लोग अभी भी इससे पूरी तरह मुक्त नहीं हो सके हैं। जिन्होंने अपनों को खोया है उनके दर्द की कल्पना भर करने से शरीर में डर के मारे सिहरन सी दौड़ जाती है। जिन घरों का कमाने वाला सदस्य ही दुनिया छोड़कर चला गया, उन परिवारों का क्या होगा? हम सब ने कोरोना के कारण जवान मौतें होते हुए अपनी आंखों के सामने देखा है और जो हम और आप जैसे लोग बच गए हैं वे सब भी दहशत के साये में जीये हैं। भले ही कोई कितनी भी शेखी बघारे परंतु यह सच्चाई है कि इस अनोखे वायरस ने भारतवासियों को एक अप्रत्याशित नई मुसीबत में डाला जिससे निकलने में अभी उसे काफी समय लगेगा।

यह सही है कि देश के समझदार और साहसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना से समय रहते आवश्यक कदम उठाते हुए देश को कोरोना से लड़ने में सक्षम बनाया और अंततः जीत भी हासिल की। जब कोरोना ने कहर ढाना प्रारंभ किया था तब तो यही लग रहा था कि न जाने इस भयानक तूफान की चपेट में कितने करोड़ लोग आएंगे, परंतु कोरोना से निपटने के लिए तरह तरह के कदम उठाए गए, आवश्यक दिशानिर्देश जारी किए गए। इस प्रकार एक तरफ जनता के जीवन को सुरक्षित करने का हर संभव प्रयास किया गया और दूसरी तरफ देश आर्थिक संकट की चपेट में न आ जाए, इसके लिए भी सरकारी स्तर पर जरूरी कदम उठाए गए। हालांकि देश की अर्थ व्यवस्था इस वायरस की चपेट से अपने आपको पूरी तरह बचा लेगी, ऐसा सोचना भी मूर्खता ही कहा जाएगा और शायद ही किसी ने ऐसा सोचा हो। हां, देश की अर्थव्यवस्था की वैसी दुर्गति नहीं हुई जैसी कि अपेक्षा की जा रही थी। मोदी सरकार की तरफ से विभिन्न सेक्टरों को विविध योजनाओं के माध्यम से तत्काल राहत देना और साथ ही दीर्घकालीन सोच के साथ सकारात्मक सहयोगी रवैया अपनाकर सराहनीय काम किया गया। यही कारण रहा कि उद्योग व्यवसाय की भी कमर टूटने के बावजूद वह फिर उठ खड़े हुए। साल बीतते बीतते भारत के आम आदमी के चेहरे पर फिर से एक नई आशा की किरण दिखाई देने लगी। हर सामान्य तबके का देशवासी यह सोचने लगा है कि नए वर्ष में मेहनत अधिक करनी होगी परंतु वह पूर्ववत अपने पैरों पर खड़ा हो जाएगा। हर व्यक्ति पूरे जज्बे से भरा दिखाई दे रहा है, वह वर्ष 2020 को भूल जाना चाहता है। वह बीत रहे इस वर्ष को केवल एक अनुभव के रूप में लेना चाहता है जिसने बहुत कुछ सीखने को बाध्य किया।

वर्ष 2020 ने मनुष्य को बहुत कुछ सिखाया। आदमी केवल और केवल पैसे के पीछे भागता रहता था और उपलब्ध समय का उपयोग अपने स्वयं के लिए, अपने अजीज परिजनों के लिए भी नहीं कर पाता था, उसे लगता था कि पैसा ही सब कुछ है, उस मनुष्य ने अपनी आंखों से देखा कि वही पैसा कोरोना से लोगों की जान नहीं बचा सका। कोरोना से मरने वालों के अंतिम दर्शन तक परिजन जब निकट से नहीं कर सके तो लोगों को लगा कि पैसा भी सब कुछ उपलब्ध नहीं करा सकता। महिनों के लंबे लाकडाउन में लोग अपने अपने घरों में कैद रहे तो अपने परिवार के सदस्यों के साथ उन्हें रहने का सही मायने में अवसर मिला। परिवार के सदस्यों को आपसी सामंजस्य, सहयोग का महत्व समझ में आया और परस्पर आत्मीयता में इजाफा हुआ। परिवार के सदस्यों में बांडिंग मजबूत हुई, केयरिंग की भावना पैदा हुई, सहयोग करने की आदत निर्मित हुई और कम खर्च में ज्यादा अच्छे तरीके से घर का खर्च चलाना सीखा। और वह भी बिना किसी से शिकवा शिकायत किए। हर कोई संतुष्ट नजर आया। अपने से कमजोर लोगों का सहयोग करने की भावना जागृत हुई। हर व्यक्ति अपने स्वास्थ्य के प्रति पहले से कहीं ज्यादा जागृत दिखाई दिया और कोरोना के प्रति दूसरों को जागरूक करने में भी अधिकांश लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इसमें कतई दो राय नहीं कि इस कोरोना काल ने बहुत कुछ ऐसा सिखाया जो जीवन में काम आएगा। अब हर कोई वर्ष 2021 का पूरे उत्साह के साथ स्वागत करने को आतुर है। ऐसे समय में नए सिरे से फिर कोई वायरस दस्तक दे सकता है, ऐसा समाचार मनोबल गिराने वाला हो सकता है परंतु भारतवासियों ने यह साबित कर दिया है कि यहां का निवासी हर परिस्थिति का सामना करने में सक्षम है, वह अब किसी वायरस से डरने वाला नहीं है। सरकार सजग है, नागरिक सतर्क है। सरकार वैक्सीन अतिशीघ्र लाने और वितरण के लिए तैयार है। आने वाला वर्ष हर भारतवासी के लिए मंगलकारी होगा, इसी आशा और विश्वास के साथ वर्ष 2021 में कदम रखने हैं।