देश में पहली बार: केआईएसएस ने स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया शतरंज

प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए केआईआईटी संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत।
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए केआईआईटी संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत।

भुवनेश्वर/दक्षिण भारत। शतरंज को स्कूल स्तर के पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए अंतरराष्ट्रीय शतरंज संघ (एफआईडीई) की नीति के बाद, दुनियाभर के विभिन्न देशों में इस पर अमल किया है। इस संदर्भ में, अखिल भारतीय शतरंज संघ (एआईसीएफ) ने शतरंज को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया।

इसके बाद एआईसीएफ और ऑल ओडिशा शतरंज एसोसिएशन (एओसीए) ने पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए शतरंज के पहले स्कूल के रूप में कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (केआईएसएस) को चुना है।

यहां एक प्रेसवार्ता में एआईसीएफ सचिव भगत सिंह चौहान, अध्यक्ष संजय कपूर, उपाध्यक्ष भावेश पटेल, कोषाध्यक्ष नरेंद्र शर्मा, एओसीए अध्यक्ष रंजन मोहंती और एओसीए सचिव देवव्रत भट्टा ने यह घोषणा की कि केआईएसएस अपने स्कूल पाठ्यक्रम में शतरंज को शामिल करने वाला ऐसा पहला संस्थान होगा।

उन्होंने कहा कि इस तरह के कार्यक्रमों का प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय शतरंज संघ करेगा। केआईआईटी और केआईएसएस आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करेंगे, वहीं एफआईडीई और एआईसीएफ सभी प्रकार के सहयोग का विस्तार करेंगे।

विशेष रूप से, केआईआईटी और केआईएसएस संस्थापक डॉ. अच्युत सामंत संस्थाओं के जरिए शतरंज को पिछले करीब एक दशक से बढ़ावा दे रहे हैं, जिसकी बदौलत यहां के कई विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शिरकत की है।

स्थानीय से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की शतरंज प्रतियोगिताओं के लिए केआईआईटी और केआईएसएस खिलाड़ियों को प्रोत्साहन एवं इस खेल को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं।

बताया गया कि आधारभूत संरचना, कोच और सुविधाओं के आधार पर शैक्षणिक पाठ्यक्रम में शतरंज को एक खेल के रूप में शामिल करने के लिए एआईसीएफ के साथ केआईएसएस की वार्ता पिछले साल से की जा रही थी। शतरंज को केआईएसएस के अकादमिक सत्र 2021-22 के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने को लेकर सभी प्रबंध कर लिए गए हैं।

इस पर खुशी जताते हुए डॉ. सामंत ने एआईसीएफ और एओसीए को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास केआईएसएस के साथ ओडिशा के अनेक शतरंत खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रदर्शन करने में सक्षम बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम के भाग के रूप में शतरंज विद्यार्थियों की काफी मदद करेगा। यह उनके मानसिक विकास के लिए वरदान साबित होगा। इस अवसर पर, केआईआईटी-डीयू के खेल निदेशक डॉ. गगनेंदु दाश और एआईसीएफ व एओसीए के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।