नई दिल्ली। चीनी सैनिकों ने भारतीय क्षेत्र में एक किलोमीटर अंदर तक घुसपैठ की और उत्तराखंड में चमोली जिले के बाराहोती इलाके में मवेशी चरा रहे चरवाहों को धमकी दी। यह बात सोमवार को आधिकरिक सूत्रों ने कही। घटना से अवगत अधिकारियों ने नाम गोपनीय रखने की शर्त पर कहा कि घुसपैठ की घटना २५ जुलाई की सुबह हुई। भारतीय क्षेत्र में घुसे चीनी सैनिकों ने चरवाहों को वहां से चले जाने को कहा। यह घटना ऐसे समय हुई है जब सिक्किम के पास डोकलाम में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच पहले ही गतिरोध चल रहा है। बाराहोती उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से करीब १४० किलोमीटर दूर है। यह उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा वाले मध्य सेक्टर की तीन सीमा चौकियों में से एक है। अधिकारियों ने बताया कि यह एक विसैन्यीकृत क्षेत्र है जहां भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवानों को अपने हथियार ले जाने की अनुमति नहीं है।वर्ष १९५८ में भारत और चीन ने बाराहोती को एक विवादित क्षेत्र के रूप में सूचीबद्ध किया था जहां दोनों पक्षों में से कोई भी अपने सैनिक नहीं भेजेगा। वर्ष १९६२ के युद्ध के दौरान पीएलए ने मध्य सेक्टर में प्रवेश नहीं किया था और अपना ध्यान पश्चिमी सेक्टर (लद्दाख) और पूर्वी सेक्टर (अरुणाचल प्रदेश) पर केंद्रित रखा था। युद्ध के बाद आईटीबीपी के जवान गैर जंगी तरीके (जिसमें राइफल की नाल जमीन की तरफ रखी जाती है) से इस क्षेत्र में गश्त करते थे। सीमा विवाद के समाधान के लिए वार्ताओं के दौरान भारत जून २००० में एकतरफा रूप से इस बात पर सहमत हो गया था कि आईटीबीपी के जवान तीन चौकियों-बाराहोती और करौली तथा हिमाचल प्रदेश में शिपकी में हथियार लेकर नहीं जाएंगे। आईटीबीपी के लोग सिविल ड्रेस में गश्त करने जाते हैं और बाराहोती के चारागाह में सीमावर्ती गांवों से भारतीय चरवाहे अपनी भे़डों तथा तिब्बत के लोग अपने याक चराने आते हैं।भारत तिब्बत सीमा पुलिस के सूत्रों ने बताया कि चीन की तरफ से सीमा का उल्लंघन पहली बार १५ जुलाई और दूसरी बार २५ जुलाई को हुआ। दोनों बार करीब १५-२० चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में आए और कुछ देर रहने के बाद चले गए। आईटीबीपी के एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखे जाने की शर्त पर बताया कि तकनीकी रूप से यह सीमा का उल्लंघन है न कि घुसपैठ।2५ जुलाई की सुबह पीएलए के करीब १५ से २० जवान बाराहोती सीमा सीमा में 300 मीटर तक अंदर आए और दो घंटे तक इस क्षेत्र में रुके रहे। सरकार ने उत्तराखंड में चमोली जिले के बाराहोती में गत सप्ताह चीनी सेना की घुसपैठ को अधिक तूल नहीं देने का फैसला किया है। विदेश मंत्रालय के सूत्रों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की चीन यात्रा की पूर्व संध्या पर २६ जुलाई को हुई इस घुसपैठ के बारे में पूछे जाने पर कहा कि ऐसी घटनाएं पूर्व में भी अनेक बार हुई हैं लेकिन उन्हें स्थानीय स्तर पर आराम से सुलझा लिया गया। इसलिए ऐसी घटनाओं को बहुत तूल देने की जरूरत नहीं है। उधर, सेना ने चीनी सेना की घुसपैठ की रिपोर्टों को गलत बताया है। उसका कहना है कि इस क्षेत्र में सीमा का निर्धारण नहीं होने के कारण सैनिक कभी कभी एक दूसरे की सीमा में प्रवेश कर जाते हैं।