पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी

इस्लामाबाद। करतारपुर कॉरिडोर के बहाने पाकिस्तान भले ही अमन, दोस्ती और दिलों को जोड़ने की बात कह रहा है लेकिन उसकी असल मंशा कुछ और है। उसके विदेश मंत्री ने एक बयान में इसे जाहिर भी कर दिया है। दरअसल पाक में इमरान सरकार के सौ दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में उसके विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी उसकी शान में कसीदे पढ़ रहे थे। इस मौके पर इमरान भी वहीं मौजूद थे। कुरैशी ने साफ किया कि करतारपुर कॉरिडोर शिलान्यास समारोह इमरान खान की ‘गुगली’ है, जिसमें मोदी सरकार बोल्ड हो गई।

आमतौर पर बयानों में बेहद नरमाई से बोलने वाले कुरैशी ने कहा, आपने देखा और दुनिया ने देखा कि कल इमरान खान ने करतारपुर की गुगली फेंक दी और उस गुगली का नतीजा क्या हुआ कि जो हिंदुस्तान मिलने से कतरा रहा था, उसे दो मंत्रियों को भेजना पड़ा। वे पाकिस्तान आए। इस तरह कुरैशी ने साबित कर दिखाया कि पाकिस्तान की असल मंशा कुछ और है। वह करतारपुर जैसी धार्मिक जगह का इस्तेमाल भी साजिशों के लिए कर रहा है।

कुरैशी ने बताया कि अफगानिस्तान के बाद भारत उनका दूसरा महत्वपूर्ण पड़ोसी है। उन्होंने इमरान की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री बनते ही उन्होंने भारत की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाया और बातचीत के लिए पहल की। कुरैशी ने अपने मुल्क के आतंकवाद का जिक्र नहीं किया लेकिन भारत पर आरोप लगा दिया कि वहां सियासत आड़े आ गई और भारत-पाक के प्रतिनिधि न्यूयॉर्क में नहीं मिल सके।

बता दें कि गुरुवार को पाकिस्तान में इमरान की सरकार बने सौ दिन पूरे हुए। इसकी वहां काफी चर्चा थी। कुरैशी ने करतारपुर कॉरिडोर के बहाने इमरान सरकार की तारीफ में भारत के खिलाफ ‘गुगली’ शब्द का इस्तेमाल किया, जिस पर यहां काफी लोगों ने आपत्ति जताई है। कुरैशी का यह बयान ऐसे मौके पर आया है जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने स्पष्ट कर दिया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। स्वराज ने कहा था कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद नहीं रोकेगा, भारत वार्ता नहीं करेगा और न ही प्रधानमंत्री मोदी सार्क सम्मेलन में आएंगे।

करतारपुर कॉरिडोर पर सुषमा स्वराज ने कहा था कि देश में सरकार कोई भी रही हो, सबने इसकी मांग की थी। हम सब ऐसा चाहते थे। पाक की ओर से अब इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी गई है। स्वराज ने स्पष्ट कर दिया था कि इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि दोनों मुल्कों में द्विपक्षीय बातचीत शुरू हो जाएगी। यह तभी मुमकिन होगा जब पाकिस्तान आतंकवाद फैलाना बंद करेगा।

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