बेटा-दामाद समेत बुरी तरह हारे आतंकी हाफिज सईद के उम्मीदवार, कहीं नहीं खुला खाता

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आतंकी हाफिज सईद
आतंकी हाफिज सईद

हाफिज ने अल्लाहो अकबर नामक पार्टी के मंच से अपने उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया। हाफिज पाकिस्तान की अवाम से अपील करता था कि वह उसके उम्मीदवारों को वोट देकर संसद भेजे।

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में मतगणना के बाद रुझान इमरान खान के पक्ष में आ रहे हैं। इन चुनावों में जोरशोर से शामिल हुए आतंकी हाफिज के उम्मीदवार बुरी तरह हारे हैं। हाफिज सईद मुंबई हमलों का मुख्य साजिशकर्ता और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी है। उसने इन चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़े किए थे और भारत-विरोधी नारे लगाए थे, लेकिन पाकिस्तान की अवाम ने उस पर भरोसा नहीं जताया। हाफिज का एक भी उम्मीदवार इन चुनावों में नहीं जीत पाया।

उसने अपने बेटे तल्हा और दामाद खालिद को भी चुनावों में खड़ा किया था। ये दोनों बुरी तरह हारे हैं। हाफिज ने अपने 265 उम्मीदवार उतारे ​थे। उसकी मंशा थी कि इन उम्मीदवारों की जीत के बाद वह सत्ता में भागीदार हो जाएगा। अगर प्रधानमंत्री न बना तो भी कई विभागों में उसकी घुसपैठ हो जाएगी। इसके बाद यह चर्चा हो रही थी कि हाफिज जैसा आतंकी अगर पाकिस्तान के परमाणु हथियारों तक पहुंच गया तो पूरी दुनिया को उससे खतरा है।

अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तान ने उसकी पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग को मान्यता नहीं दी। इससे हाफिज रुका नहीं। उसने अपने उम्मीदवार खड़े करने का दूसरा रास्ता अपना लिया। हाफिज ने अल्लाहो अकबर नामक पार्टी के मंच से अपने उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाया। हाफिज पाकिस्तान की अवाम से अपील करता था कि वह उसके उम्मीदवारों को वोट देकर संसद भेजे।

पाकिस्तान चुनाव के ताजा नतीजे हाफिज के लिए तगड़ा झटका हैं। फिलहाल तो पाकिस्तान की सत्ता में वह प्रत्यक्ष रूप से भागीदारी हासिल करने से वंचित रह गया।

पाकिस्तान की संसद में कुल 342 सीटें हैं। इनके लिए 272 सदस्य सीधे चुनाव से आते हैं। वहां 60 सीटें महिलाओं और 10 सीटें अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षित की गई हैं। इस तरह बहुमत लाने के लिए 137 सीटें लानी जरूरी होती हैं।

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