नई दिल्ली। तेल क्षेत्र की ब़डी कंपनी आर्मको दुनिया के सबसे ब़डे रिफाइनरी सह पेट्रोकेमिकल परिसर में हिस्सेदारी खरीदने के लिए विशेष बातचीत करने को इच्छुक है। भारत की ४० अरब डालर की लागत से महाराष्ट्र में यह परिसर बनाने की योजना है।पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि पिछले महीने वियना में सऊदी अरब के ऊर्जा, उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री एवं सउदी आर्मको के चेयरमैन खालिद ए अल फलीह ने उनके साथ भेंट के दौरान छह करो़ड टन क्षमता की रिफाइनरी और १-१.२ करो़ड टन के पेट्रोरसायन परिसर में हिस्सेदारी खरीदने में रचि प्रकट की थी।उन्होंने यहां आईओसी, बीपीसीएल और एचपीसीएल द्वारा इस विशाल परिसर की स्थापना के लिए संयुक्त उपक्रम संधि पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद कहा, उन्होंने निश्चय तौर से कहा कि सउदी आर्मको शुर से ही इस मेगा रिफाइनरी में साझेदारी करने को इच्छुक है। वैसे सऊदी आर्मको पहले ग्रीनफील्ड रिफाइनरियों में इच्छुक थी लेकिन उसकी यह इच्छा निवेश में तब्दील नहीं हो सकी। दुनिया की यह सबसे ब़डी तेल उत्पादक कंपनी ९० लाख टन क्षमता की बठिंडा रिफाइनरी में इच्छुक थी लेकिन वह १९९८ में उससे अलग हो गई। उसके बाद स्टील उद्योगपति एन मिाल के साथ मिलकर संयुक्त उपक्रम के तौर पर एचपीसीएल ने यह रिफाइनरी स्थापित की।इसी तरह आईओसी की ओडिशा की पारादीप रिफाइनरी में शुर में रूचि दिखाई थी लेकिन वर्ष २००६ में वह उससे अलग हो गई। वैसे इस बार प्रधान को पूरा विश्वास है कि आर्मको अबकी बार गंभीर है। उन्होंने कहा, वे कह रहे हैं कि (हिस्सेदारी के लिए) कृपया हमसे विशेष बातचीत कीजिए। वे कहते हैं कि आपको किसी और से बात करने की जरुरत नहीं है। सऊदी आर्मको के अलावा अबू धाबी नेशनल ऑयल को ने भी इस परियोजना में हिस्सेदारी लेने में रचि दिखाई थी।

पिछले महीने वियना में सऊदी अरब के ऊर्जा, उद्योग एवं खनिज संसाधन मंत्री एवं सउदी आर्मको के चेयरमैन खालिद ए अल फलीह ने उनके साथ भेंट के दौरान छह करोड़ टन क्षमता की रिफाइनरी और 1-1.2 करोड़ टन के पेट्रोरसायन परिसर में हिस्सेदारी खरीदने में रचि प्रकट की थी।